सिर पर 'बोरा' का गठरी लाद 'बोरा ले लो’ का नारा लगाने वाला शिक्षक निलंबित, शिक्षा विभाग ने छवि धूमिल करने वाला बताया कृत्य

सिर पर 'बोरा' का गठरी लाद 'बोरा ले लो’ का नारा लगाने वाला शिक्षक निलंबित, शिक्षा विभाग ने छवि धूमिल करने वाला बताया कृत्य

PATNA: कटिहार जिले के एक शिक्षक, मो. तमीजुद्दीन का वीडियो रविवार से ही सोशल मीडिया पर काफी वायरल है। इनके वीडियो ने एक बार फिर बिहार के शिक्षा विभाग की कलई खोलने का काम किया है। दरअसल वायरल वीडियो में दिख रहे तमीजुद्दीन अपने सर पर बोरा लादे और हाथों में तख्ती लिए हुए सार्वजनिक स्थानों पर बोरा बेचते नजर आ रहे हैं। इनके हाथ में तख्ती भी थी, जिसपर लिखा था, ‘मै बिहार सरकार के सरकारी स्कूल का शिक्षक हूं। सरकार के आदेश पर खाली बोरा बेच रहा हूं।’

इस वीडियो को देखने के बाद बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा उक्त शिक्षक पर गाज गिर गई है। बिहार सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक पत्र में यह कहा गया है कि शिक्षक का यह कार्य न केवल अशोभनीय एवं आचरण नियमावली के खिलाफ है। अपितु इससे विभाग की छवि को धूमिल करने का भी काम किया गया है। इस वजह से नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा उन्हें विभागीय कार्रवाई के अधीन किया गया है।

जानिए क्या है पूरा मामला

उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के गृह जिले से यह मामला सामने आया है। दरअसल वायरल हुए इस वीडियो में दिख रहा इलाका कदवा विधानसभा क्षेत्र के कदवा सौनैली बाजार है, जहां शिक्षक मो. तमीजुद्दीन विद्यालय का पठन पठन का कार्य छोड़कर सड़कों पर बोरा बेचते नजर आए। यह मामला यूं ही इतना चर्चित नहीं हुआ। दरअसल उन्होनें गले में तख्ती टांग रखी थी। जिसपर लिखा था- ‘मै बिहार सरकार के सरकारी स्कूल का शिक्षक हूं। सरकार के आदेश पर खाली बोरा बेच रहा हूं।’ उनका कहना था कि विद्यालयों में जो चावल के बोरे उपलब्ध कराए गए थे वह अधिकतर कटे-फटे थे। यदि बोरे को ऐसे ही विद्यालय में रखा जाता है तो उन्हें चूहे काट देते हैं। ऐसे कटे फटे हुए बोरे 10 रुपया में शिक्षक बेचने को निकले और इसपर लोगों ने उनसे कई तरह के सवाल भी पूछे।

शिक्षा विभाग ने खुद ही दिया था आदेश

दरअसल शिक्षा विभाग ने खुद ही स्कूलों को आदेश दिया था कि वित्तीय वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015 -16 के मिड डे मील के खाली पड़े बोरे को 10 रुपये पीस बेचकर सरकार के मद में शिक्षकों को राशि जमा करवानी है। अब सवाल यह उठता है कि जब एक शिक्षक विभाग के आदेश का ही पालन कर रहा था, तो उसे इस तरह निलंबित करने का क्या औचित्य है?  

इधर सरकार की इस कार्रवाई से चिंतित शिक्षक तमीजुद्दीन काफी चिंता में हैं। उन्होंने अब अपने निलंबन के बाद हमसे क्या भूल हुई.. गीत गाकर सरकार से गुहार लगाई है और निलंबन मुक्त करने की मांग कर रहे हैं। निलंबन के बाद तमीजुद्दीन गुहार लगा रहे हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है फिर उनको ऐसी सजा क्यों दी जा रही है।



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