महान गणितज्ञ का स्मृति शेष...जब चार सालों से लापता वशिष्ठ नारायण सिंह भिखारी के वेश में मिले थे

महान गणितज्ञ का स्मृति शेष...जब चार सालों से लापता वशिष्ठ नारायण सिंह भिखारी के वेश में मिले थे

PATNA: देश के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे. गुरूवार की सुबह उन्होंने पीएमसीएच में अंतिम सांस ली।उनके जाने से पूरा बिहार शोकाकुल है। वशिष्ठ नरायण सिंह अपने पीछे भरा पूरा परिवार को छोड़कर चले गए. महान गणितज्ञ वशिष्ठ बाबू का जन्म 2 अप्रैल 1946 को भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव में हुआ था. उनके पिता लाल बहादुर सिंह बिहार पुलिस में कार्यरत थे। उनकी मां लहसी देवी गृहणी थी. वशिष्ठ बाबू तीन भाई और दो बहनों में सबसे बड़े थे. 73 वर्ष की उम्र में वशिष्ठ नरायण सिंह का निधन हुआ।

चार सालों से लापता वशिष्ठ बाबू भिखारी के पास मिले थे 

अपने भाईयों में सबसे बड़े वशिष्ठ नारायण सिंह सिज़ोफ्रेनिया नामक बीमारी से ग्रसित थे।उनके गांव बसंतपुर के लोग बताते हैं कि  1989 से लेकर 1993 तक वशिष्ठ नारायण सिंह गायब थे। वो कहां थे किसी को नहीं पता चल सका।परिवार के लोग चार सालों तक खोजबीन करते रहे।तब सात फरवरी 1993 को छपरा के डोरीगंज में एक भिखारी के पास पाए गए।वे भिखारी के पास जूठन साफ करते दिखे थे।स्थानीय लोगों ने बताया कि 1989 में परिवार के लोग इलाज के लिए पुणे ले जा रहे थे इसी बीच खंडवा स्टेशन पर वे अपने भाई से बिछड़ गए थे।


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