जातीय गणना पर नीतीश सरकार को मिली जीत तो पीएम मोदी से तेजस्वी -ललन ने कर दी बड़ी मांग, भाजपा पर भड़के

जातीय गणना पर नीतीश सरकार को मिली जीत तो पीएम मोदी से तेजस्वी -ललन ने कर दी बड़ी मांग, भाजपा पर भड़के

पटना. जातीय गणना कराने के बिहार सरकार के निर्णय पर पटना हाई कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद जदयू और राजद ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मंगलवार को हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हमारी सरकार के जाति आधारित सर्वे से प्रामाणिक, विश्वसनीय और वैज्ञानिक आँकड़े प्राप्त होंगे। इससे अतिपिछड़े, पिछड़े तथा सभी वर्गों के गरीबों को सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा। जातीय गणना आर्थिक न्याय की दिशा में बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम होगा। उन्होंने कहा कि हमारी माँग है कि केंद्र सरकार जातीय गणना करवाए। उन्होंने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि OBC प्रधानमंत्री होने का झूठा दंभ भरने वाले देश की बहुसंख्यक पिछड़ी और गरीब आबादी की जातीय गणना क्यों नहीं कराना चाहते?

वहीं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी जातीय गणना के बहाने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि जातीय गणना के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज किया है उसका स्वागत है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा जातीय गणना रोकने का षडयंत्र विफल हुआ और जातीय गणना का रास्ता प्रशस्त हुआ। जातीय गणना राज्य हित में है और यह पूरे देश में होना चाहिए। दरअसल पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं ख़ारिज करते हुए राज्य सरकार को बड़ी राहत दी। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध दायर याचिकायों पर में 3 जुलाई, 2023 से पांच दिनों की लम्बी सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा था।

राज्य सरकार की ओर से  सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता पी के शाही ने बताया था  कि  ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के किया जाना है। उन्होंने कोर्ट को बताया था  कि  जाति सम्बन्धी सूचना शिक्षण संस्थाओं में  प्रवेश या नौकरियों लेने के समय भी दी जाती है।एडवोकेट जनरल शाही ने कहा कि   जातियाँ  समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हर धर्म में अलग अलग जातियाँ होती है। उन्होंने कोर्ट को बताया था  कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया गया है ।

जातीय गणना को लेकर पहले ही बिहार की नीतीश सरकार ने केंद्र सरकार से अपील की थी. हालांकि मोदी सरकार ने बिहार सरकार की मांग को ख़ारिज कर दिया था. वहीं नीतीश सरकार ने जब इसे अपने बलबूते करने की योजना बनी और गणना का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो गया तो इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. वहीं अब कोर्ट के फैसला नीतीश सरकार के पक्ष में आने के बाद जदयू और राजद ने फिर से इसी बहाने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लिया है. 

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