वाह रे सुशासन ! भाजपा नेता के होटल में शराब पकड़े जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं, डीएम के आदेश को दारोगा ने खुलेआम दिखाया ठेंगा

वाह रे सुशासन ! भाजपा नेता के होटल में शराब पकड़े जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं, डीएम के आदेश को दारोगा ने खुलेआम दिखाया ठेंगा

सीतामढ़ी... बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक क्राइम से जुड़ी चार हाईलेवल मीटिंग पुलिस के आला अधिकारियों के साथ की है। सभी मीटिंग में अपराध पर अंकुश लगाने के साथ-साथ-साथ शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन सीएम के आदेश तो छोड़िए, जिले के आला अधिकारी जब कार्रवाई करते हैं तो उनके मातहत काम करने वाले अधिकारी ही उन्हें ठेंगा दिखा देते हैं। इतना ही नहीं हाल ही में एक आदेश के तहत सूबे में शराबबंदी पर सख्ती से पालन कराने के लिए सभी पुलिस पदाधिकारियों को शपथ भी दिलाई गई थी, ऐसे में यही कह सकते हैं, वाह रे सुशासन !

ताजा मामला सीतामढ़ी है, जहां डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा के आदेश को महासौल ओपी ने ही ठेंगा दिखा दिया। जानकारी के मुताबिक 13 दिसंबर की रात शराबबंदी कानून का पालन कराने के लिए अभियान चलाकर रेलवे स्टेशन स्थित दो होटलों में छापामार कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में दो हाेटलों से शराब और शराब का सेवन करने वाले लोग मिले। इसके बाद मौके पर ही आदेश देकर डीएम ने दोनों होटलों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए, लेकिन डीएम के आदेश के बावजूद महसौल थाना क्षेत्र के संबंधित पुलिस पदाधिकारियों ने एफआईआर में सिर्फ एक ही होटल का नाम दिया, जबकि दूसरे का नाम देना मुनासिब नहीं समझा। 

बिहार मीट पराठा हाउस का नाम FIR से गायब

बता दें कि 13 दिसंबर को सीतामढ़ी जिले में विधि-व्यवस्था व शराबबंदी के सच को जानने के लिए डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा व एसपी अनिल कुमार आधी रात में शहर में पहुंचे। इस दौरान रेलवे स्टेशन रोड स्थित दो होटलों में शराब का सेवन खुलेआम किया जा रहा था। रेलवे स्टेशन पर उतर कर आने-जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में नहीं रखकर मेहसौल ओपी पुलिस की लापरवाही के कारण होटल मयखाना में बदला हुआ है। 

डीएम और एसपी की संयुक्त उपस्थिति में कार्रवाई करते हुए होटल त्रिमूर्ति व बिहार मीट पराठा हाउस में शराब की बोतलें मिली। इस दौरान शराब के साथ एक व्यक्ति को भी पकड़ा गया। इस दौरान डीएम ने भी माना कि समीप के थाना प्रभारी की मिलीभगत के बगैर कोई भी दुकानदार इस तरह के कारोबार करने की हिम्मत नहीं जुटा सकता है। 

शराब की बरामदगी को डीएम ने गंभीरता से लेते हुए एसपी को संबंधित थानाध्यक्ष के अलावा अन्य अधिकारियों पर जवाबदेही तय कर कार्रवाई करने की बात कही, इसके बावजूद जब एफआईआर में सिर्फ त्रिमूर्ति होटल का नाम दिया गया, जबकि बिहार मीट पराठा हाउस का नाम ही गायब कर दिया गया। 

डीपीआरओ की ओर से लिखे एग मैसेज के स्क्रीन शॉट से पता चलता है। देखें नीचे...


उपरोक्त डीपीआरओ परिमल कुमार के स्क्रीन शॉट मे आप साफ देख सकते हैं कि कार्रवाई के बाद दोनों होटल का नाम बताया गया है जबकि एफआईआर की कॉपी में सिर्फ एक ही होटल का नाम दर्शाया गया है। जो नीचे आप दिए गए पत्र में देख सकते हैं। 

आपको बता दें कि डीएम और एसपी की कार्रवाई में जिन होटलों पर कार्रवाई की गई, उसमें आज भी एक बंद है तो दूसरा खुला हुआ है। डीएम की कार्रवाई के बाद होटल त्रिमूर्ति और बिहार मीट पराठा हाउस को सील कर दिया गया, लेकिन एफआईआर में नाम नहीं आने की वजह से बिहार मीट पराठा हाउस अब भी पहले की तरह संचालित है। 

बताया जाता है कि एक भाजपा नेता का होटल होने के कारण कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, बिहार मीट पराठा हाउस में अधिकारियों की रेड के दौरान सभी शराब कारोबारी भागने में सफल रहे थे, लेकिन पुलिस ने बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतले जब्त की थी। 

डीएम-एसपी के संयुक्त छापेमारी के बावजूद जब  मेहसौल ओपी में पुलिस की ओर से जो  प्राथमिकी दर्ज की गई, वो बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस पदाधिकारी के बयान पर जो प्राथमिकी दर्ज की गई है, उसमे न तो अधिकारियों की रेड का जिक्र किया गया और न ही भाजपा नेता के होटल का। जिस होटल संचालक (त्रिमूर्ति मीट हाउस) की गिरफ्तार की गई थी, उसे बेल भी मिल गई। 

कार्रवाई के बाद डीएम के आदेश

मेहसौल ओपी क्षेत्र में धड़ल्ले से शराब मिलने और दुकानों में खुलेआम शराब पिलाए जाने मामले  में डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा उस वक्त काफी सख्त दिखीं दी थी। उन्होंने कहा था कि जिन-जिन क्षेत्रों में शराब मिली है। वहां के संबंधित एसएचओ सहित अधिकारियों पर जबाबदेही तय कर करवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में किसी को भी नही बख्सा नही जाएगा।

पटना से मदन के साथ आदित्य की रिपोर्ट


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