Ramanavami 2025: रामनवमी के पावन मौके पर अयोध्या में होने वाला रामलला का सूर्याभिषेक, जानें पूरे कार्यक्रम का लेखा-जोख
अयोध्या धाम में रामनवमी के पावन अवसर पर रामलला का सूर्य तिलक और 56 भोग सहित अनेक विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। जानिए पूरे आयोजन की समय-सारणी, दर्शन, और आध्यात्मिक महत्व।

Ramanavami Ayodhya: अयोध्या में इस वर्ष रामनवमी का उत्सव एक विशेष ऐतिहासिक क्षण बनया जाएगा। जब ठीक दोपहर 12 बजे चार मिनट तक सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ेगी और उन्हें दिव्य सूर्य तिलक प्राप्त होगा। इसे "सूर्याभिषेक" नाम दिया जाएगा, जिसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन और सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश और दुनिया में होगा।
सूर्य तिलक की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि
यह आयोजन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि तकनीकी दृष्टि से भी अद्वितीय होने वाला है। सीबीआरआई (Central Building Research Institute) की टीम ने इस पूरे आयोजन की वैज्ञानिक निगरानी का जिम्मेदारी मिलेगी, जिसमें मंदिर की संरचना इस प्रकार बनाई गई है कि वर्ष में एक बार राम नवमी के दिन सूर्य की किरणें दोपहर 12:00 से 12:04 बजे तक ठीक रामलला के मस्तक पर पड़ेगी।
विश्व भर में फैली आस्था
इस चार मिनट की अनुभूति के दौरान मंदिर में घंटा-घड़ियाल, नगाड़ों की थाप, और आरती की स्वर लहरियों ने वातावरण को आभामंडल से भर जाने वाला है। पूरे अयोध्या शहर को LED स्क्रीनों और चलित प्रसारण वाहनों के माध्यम से सजाया जाएगा, ताकि हर भक्त इस दृश्य का साक्षी बनने का मौका मिलेगा
रामलला के दर्शन और पूजन का विस्तृत कार्यक्रम
रामनवमी के दिन रामलला मंदिर में पूजा-पाठ और दर्शन की एक निश्चित समयसारिणी बनाई गई थी, जो श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित रूप से दिव्य दर्शन प्रदान करती है।
मुख्य कार्यक्रम
सुबह 4:30 बजे: मंगल आरती
6:30 बजे: दर्शन प्रारंभ
9:30 बजे: शहद, दूध, घी, सरयू जल और गंध से रामलला का अभिषेक
10:30 से 11:30 बजे: विशेष श्रृंगार
11:45 बजे: पट बंद
12:00 से 12:04: सूर्य तिलक और जन्मोत्सव आरती
12:05 बजे: पट पुनः खुलने के बाद 56 भोग अर्पित
कोई वीआईपी पास नहीं
इस बार की अनोखी विशेषता यह रही कि रामनवमी के लिए कोई वीआईपी पास जारी नहीं किए गए। यह निर्णय सबको समान अवसर देने और भक्ति में समरसता लाने की दिशा में एक स्वागतयोग्य पहल है।
मंदिरों की श्रृंखला में रचा गया रामनवमी महोत्सव
अयोध्या धाम में सिर्फ राम मंदिर ही नहीं, बल्कि पाँच हजार से अधिक मंदिरों में रामनवमी की धूम रही। संकटमोचन हनुमान किला, अंगद टीला, सुग्रीव किला और अन्य स्थानों पर रामचरितमानस पाठ, राम महायज्ञ, और भजन-कीर्तन ने भक्तों को गहरे आध्यात्मिक अनुभव दिए।
महायज्ञ और नवाह्न पारायण
अनेक मंदिरों में राम मंत्र की आहुतियों और नवाह्न पारायण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हव्यों की सुगंध और भजन की स्वर लहरियां श्रद्धालुओं को श्रीराम के अवतरण की अनुभूति कराती रहीं।