Bengal Politics : टीएमसी में महाबगावत ! 20 से अधिक सांसदों ने किया क्षेत्रीय दल में विलय का ऐलान, एनडीए को समर्थन की तैयारी, ममता खेमे में खलबली

Bengal Politics : TMC के भीतर लंबे समय से सुलग रही अंदरूनी कलह अब सीधे संसद तक पहुंच गई है, जहां टीएमसी के बागी सांसदों ने एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक फैसला लिया है।

Bengal Politics : टीएमसी में महाबगावत ! 20 से अधिक सांसदों न
टीएमसी में टूट - फोटो : SOCIAL MEDIA

NEW DELHI :  पश्चिम बंगाल की सत्ता के बेदखल तृणमूल कांग्रेस में अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक टूट हो गई है। पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही अंदरूनी कलह अब सीधे संसद तक पहुंच गई है, जहां टीएमसी के बागी सांसदों ने एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक फैसला लिया है। अपनी लोकसभा सदस्यता बचाने और दलबदल विरोधी कानून की कानूनी अड़चनों से पार पाने के लिए इन बागी सांसदों ने त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी' के साथ विलय का औपचारिक एलान कर दिया है। इस बड़े सियासी उलटफेर से दिल्ली से लेकर कोलकाता तक का राजनीतिक पारा अचानक गर्म हो गया है।

लोकसभा अध्यक्ष से मिले बागी सांसद, अलग बैठने की व्यवस्था और 'असली TMC' का दर्जा मांगा

इस बड़े फैसले के तुरंत बाद रविवार को काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय सहित टीएमसी के कई वरिष्ठ बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। बागी सांसदों ने स्पीकर को पत्र सौंपकर सदन के भीतर खुद के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की औपचारिक मांग की है। बागी गुट का दावा है कि टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 से 22 सांसद उनके साथ हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अपील की है कि संसद के भीतर उनके इसी बड़े गुट को 'असली टीएमसी विधायी दल' के रूप में मान्यता दी जाए।

स्पीकर से मिलने से पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर तय हुई पूरी रणनीति

इस बड़ी बगावत की पटकथा काफी सोच-समझकर लिखी गई है। लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करने से ठीक पहले इन बागी सांसदों ने भारतीय पानागढ़ (भाजपा) के पश्चिम बंगाल प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर जाकर एक लंबी और गोपनीय बैठक की। इस अहम रणनीति बैठक में टीएमसी की फायरब्रांड नेता सायोनी घोष और सांसद माला रॉय भी शामिल थीं। बैठक के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय और अलग बैठने का अनुरोध स्पीकर से किया है। वहीं, सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा, "जब वे एक और तृणमूल कांग्रेस की मांग करेंगे, तो कोर्ट तय करेगा कि असली टीएमसी कौन सी है।"

दलबदल कानून से बचने के लिए चुनी गई त्रिपुरा की पार्टी, केंद्र में एनडीए को देंगे समर्थन

जिस 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी' में विलय का एलान किया गया है, वह मुख्य रूप से त्रिपुरा आधारित एक छोटी और कम चर्चित क्षेत्रीय राजनीतिक दल है, जिसका प्रभाव त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के कुछ चुनिंदा इलाकों में है। बागी सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए इस तकनीकी रास्ते को चुना है। चूंकि संसदीय नियमों के मुताबिक सदन में सीधे किसी नए स्वतंत्र गुट को अलग से मान्यता नहीं मिल सकती, इसलिए किसी पंजीकृत मूल दल के साथ विलय करना कानूनी मजबूरी थी। इस विलय के बाद यह बागी गुट एक नए कानूनी ढांचे के साथ केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन को अपना समर्थन सौंप देगा।

एक्शन में ममता बनर्जी; अभिषेक बनर्जी ने पत्र भेजकर लोकसभा स्पीकर से की सदस्यता रद्द करने की मांग

जैसे ही पार्टी में इतनी बड़ी टूट और बगावत की खबर कोलकाता पहुंची, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी ने भी जवाबी और आक्रामक कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही आनन-फानन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक कड़ा पत्र भेजा। ममता गुट के सांसद कीर्ति आजाद और राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने व्यक्तिगत रूप से स्पीकर आवास जाकर इस पत्र को सौंपा है, जिसमें बागी सांसदों के खिलाफ सख्त संसदीय कार्रवाई करने और उनकी सदस्यता तत्काल रद्द करने की मांग की गई है। अब गेंद पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष के पाले में है।