Tariff War: इम्पोर्टेड प्रोडक्ट्स पर नया अमेरिकी टैरिफ, भारत पर क्या होगा इसका असर?
Tariff War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि भारत अपने टैरिफ में बड़ी कटौती करेगा। इस फैसले का वैश्विक व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत जल्द ही अपने टैरिफ दरों में बड़ी कटौती करेगा। ट्रंप की इस टिप्पणी ने वैश्विक व्यापार नीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। उनके अनुसार, अमेरिका ने विभिन्न देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत जो देश अमेरिकी उत्पादों पर जितना कर लगाते हैं, अमेरिका भी उनकी वस्तुओं पर उतना ही टैरिफ लगाएगा।
भारत को लेकर ट्रंप पहले भी कई बार यह आरोप लगा चुके हैं कि वह अमेरिकी उत्पादों पर अधिक कर लगाता है। हालांकि, अब उन्होंने संकेत दिया है कि भारत अपने टैरिफ में "बड़ी कटौती" करने जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका यूरोपीय संघ, कनाडा, मैक्सिको और चीन समेत कई देशों पर टैरिफ नीति लागू करने जा रहा है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी भारत सहित अन्य देशों की शुल्क नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिकी उत्पादों को इन देशों में ऊंचे टैरिफ के कारण प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, "अमेरिका लंबे समय से अनुचित व्यापार नीतियों का शिकार हो रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप अब इसे बदलने के लिए निर्णायक कदम उठाने जा रहे हैं।"
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत यदि अपने टैरिफ दरों में कटौती करता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में सुधार होगा और अमेरिका के साथ भारत के निर्यातकों को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि, भारतीय अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस नीति का असर कुछ उद्योगों पर नकारात्मक भी हो सकता है।
ट्रंप की 'रेसिप्रोकल टैरिफ' नीति मुख्य रूप से 'टिट फॉर टैट' सिद्धांत पर आधारित है, जिसका मतलब यह है कि जो देश अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाते हैं, अमेरिका भी उनके उत्पादों पर समान कर लगाएगा। इस नीति का सबसे अधिक असर भारत, चीन, यूरोपीय संघ, कनाडा और मेक्सिको जैसे देशों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
इस मुद्दे पर भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत व्यापार संतुलन बनाए रखने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप की इस नीति का भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।