लाल किले से मोदी का रिकॉर्डतोड़ हुंकार, नेहरू के बाद सबसे लंबी सियासी आवाज,13 बार तिरंगा फहराकर मनमोहन सिंह को भी पछाड़ा

इस तरह लाल किले की प्राचीर से मोदी का सफर 65 मिनट के पहले भाषण से 103 मिनट के रिकॉर्डतोड़ संबोधन तक पहुंच चुका है।

13 बार तिरंगा फहराकर मनमोहन सिंह को भी पछाड़ा- फोटो : social Media

PM Independence Day Speech: 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। करीब 103 मिनट तक चले इस भाषण ने स्वतंत्रता दिवस पर किसी भारतीय प्रधानमंत्री के सबसे लंबे संबोधन का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। मोदी ने अपने ही पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए 2024 के 78वें स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए 98 मिनट के भाषण को पीछे छोड़ दिया।प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधनों का सफर देखें तो उनकी भाषण शैली में लगातार विस्तार दिखाई देता है। वर्ष 2014 में उन्होंने पहली बार लाल किले से देश को संबोधित किया था और उनका भाषण करीब 65 मिनट चला था। इसके बाद 2015 में 88 मिनट, 2016 में 96 मिनट और 2017 में 56 मिनट का संबोधन हुआ। 2018 में उनका भाषण 83 मिनट, 2019 में करीब 92 मिनट और 2020 में 90 मिनट का रहा।

2021 में प्रधानमंत्री ने 88 मिनट तक देश को संबोधित किया, जबकि 2022 में भाषण की अवधि 74 मिनट रही। 2023 में उन्होंने करीब 90 मिनट तक लाल किले से अपनी बात रखी। 2024 में 98 मिनट का संबोधन दिया और 2025 में 103 मिनट के साथ अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।मोदी के भाषणों की लंबाई का औसत भी खासा उल्लेखनीय है। पिछले 12 वर्षों में लाल किले से उनके स्वतंत्रता दिवस संबोधनों की औसत अवधि करीब 85 मिनट रही। सबसे छोटा संबोधन 2017 में 56 मिनट का रहा, जबकि 2025 का 103 मिनट का भाषण सबसे लंबा बना।

लेकिन लाल किले से मोदी का रिकॉर्ड सिर्फ भाषण की अवधि तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर लगातार लाल किले से संबोधन देने के मामले में भी उन्होंने लंबी सियासी विरासत कायम की है। 2025 तक वह लगातार 12वीं बार लाल किले से देश को संबोधित कर चुके थे। इस सिलसिले में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 11 स्वतंत्रता दिवस संबोधनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। हालांकि लगातार संबोधनों का सर्वकालिक रिकॉर्ड अभी भी पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम है, जिन्होंने लगातार 17 बार लाल किले से देश को संबोधित किया था।

लाल किले की प्राचीर से सबसे अधिक बार तिरंगा फहराने के मामले में भी नेहरू सबसे आगे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नेहरू ने 17 बार, इंदिरा गांधी ने 16 बार और नरेंद्र मोदी ने 2026 तक 13 बार ध्वजारोहण किया। इसके बाद मनमोहन सिंह ने 10 बार और अटल बिहारी वाजपेयी ने 6 बार लाल किले से तिरंगा फहराया।इतिहास में सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषणों की बात करें तो मोदी से पहले जवाहरलाल नेहरू का 1947 का करीब 72 मिनट का और इंद्र कुमार गुजराल का 1997 का करीब 71 मिनट का संबोधन उल्लेखनीय था। वहीं कुछ प्रधानमंत्रियों के संबोधन बेहद संक्षिप्त रहे। नेहरू और इंदिरा गांधी ने क्रमशः 1954 और 1966 में करीब 14 मिनट के भाषण दिए। मनमोहन सिंह के 2012 और 2013 के भाषण क्रमशः 32 और 35 मिनट के रहे, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 में करीब 25 मिनट और 2003 में करीब 30 मिनट तक संबोधित किया।

इस तरह लाल किले की प्राचीर से मोदी का सफर 65 मिनट के पहले भाषण से 103 मिनट के रिकॉर्डतोड़ संबोधन तक पहुंच चुका है। भाषण की लंबाई, लगातार संबोधनों और ध्वजारोहण के आंकड़े बताते हैं कि स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन बीते दशक की सबसे चर्चित राजनीतिक परंपराओं में शामिल हो चुका है।