लाल किले से मोदी का सप्तधारा संकल्प, ऊर्जा, चिप, किसान से रक्षा और सॉफ्ट पावर तक भारत को ग्लोबल ताकत बनाने का ऐलान,पढ़िए 7 शक्तियों के बारे में

Independence Day 2026: लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13वीं बार तिरंगा फहराते हुए स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक ताकत बनने का बड़ा खाका पेश किया।...

Independence Day 2026: लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13वीं बार तिरंगा फहराते हुए स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक ताकत बनने का बड़ा खाका पेश किया। पीएम मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा से लेकर सेमीकंडक्टर, रेलवे, रक्षा, खेती, टेक्नोलॉजी, ग्रीन इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर तक सात मोर्चों को देश की नई शक्ति का आधार बताया। उन्होंने इसे ‘शक्ति की सप्तधारा’ का नाम देते हुए कहा कि आने वाले 5-7 वर्षों में वह हासिल करना है, जो पिछले 5-7 दशकों में नहीं हो सका।प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदलने का दावा करते हुए कहा कि 2014 से पहले सिर्फ 70 शहरों में पाइप से गैस पहुंचती थी, जबकि पिछले 12 वर्षों में 700 शहरों के करीब पौने दो करोड़ घरों तक पाइप्ड गैस पहुंचाने का काम शुरू हुआ। सौर ऊर्जा की क्षमता भी 2 गीगावॉट से बढ़कर 160 गीगावॉट होने की बात कही गई।

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को आम परिवारों के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए मोदी ने कहा कि करीब 50 लाख घरों में सोलर एनर्जी का काम तेजी से चल रहा है। उनके मुताबिक इससे हजारों परिवारों का बिजली बिल शून्य हुआ है और कुछ लोग अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं।ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पीएम ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्र के बड़े हिस्से को पहले नो-गो एरिया घोषित किया गया था, लेकिन अब इन इलाकों को खोलकर समुद्र के भीतर नए ऊर्जा भंडार तलाशे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले साल घोषित ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत 85 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि आने वाली दुनिया में ऊर्जा की अहमियत और बढ़ेगी। देश को बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी और इसलिए ऊर्जा सुरक्षा समय की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावॉट के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।आत्मनिर्भरता के इसी सिलसिले में पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर मिशन को भारत की तकनीकी ताकत का अहम आधार बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत में चिप निर्माण की चर्चा होती रही, लेकिन प्लांट नहीं बन पाए। अब भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया है और तीन प्लांट शुरू होने के साथ वहां से निर्यात भी शुरू होने की बात कही।रेलवे के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि देश में 70 प्रतिशत रेलवे का इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा हो चुका है। बिजली से ट्रेनों के संचालन से पर्यावरण को फायदा हुआ है। साथ ही भारत ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत की है, जिसे उन्होंने देश की नई तकनीकी क्षमता का प्रतीक बताया।प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सामने आई वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं कि भारत को वैक्सीन, डीजल, गैस और खाद की कमी हो जाएगी। लेकिन सरकार की योजनाओं और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों से देश ने इन संकटों का सामना किया।उन्होंने खाद की कीमतों का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया करीब 3000 रुपये में मिलने के बावजूद भारतीय किसानों को यह करीब 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह डीएपी 1350 रुपये में देने का दावा किया गया।पीएम ने कहा कि आज दुनिया कई चीजों को ‘वेपनाइज’ यानी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। ऐसे दौर में आत्मनिर्भरता सिर्फ आर्थिक नीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत भी बन गई है। उन्होंने कहा कि भारत के पास राजनीतिक जनादेश, स्थिर सरकार, मजबूत न्याय व्यवस्था और संविधान की ताकत है और दुनिया भारत के सामर्थ्य को पहचान रही है।

उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों और ट्रेड एग्रीमेंट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि देश में बना हर उत्पाद दुनिया के बाजार तक पहुंचे। टेक्सटाइल, मशीनरी, दवाइयां और दूसरे उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाएं। पंजाब के लुधियाना से लेकर तमिलनाडु के तिरुपुर तक के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने की जरूरत पर जोर दिया।इसी व्यापक विजन को प्रधानमंत्री ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ के रूप में सामने रखा।

पहली शक्ति: मैन्युफैक्चरिंग

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग की ताकत बनना होगा। सिर्फ बड़े उत्पाद तैयार करना काफी नहीं होगा, बल्कि छोटे-छोटे पुर्जे और कंपोनेंट भी देश में बनाने होंगे। कंपोनेंट से लेकर कंप्लीट मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी सप्लाई चेन भारत में विकसित करनी होगी।

उन्होंने उद्योग जगत से ग्लोबल मार्केट में विश्वसनीयता कायम करने की अपील की। पीएम ने कहा कि गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। भारत का उत्पाद दुनिया में भरोसे का पर्याय बने, यही लक्ष्य होना चाहिए।

दूसरी शक्ति: किसान और फूड प्रोसेसिंग

सप्तधारा की दूसरी शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने किसान और खाद्य उत्पादन एवं प्रोसेसिंग को रखा। उनका कहना था कि भारत को कृषि उत्पादों को सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रखना चाहिए। देश के मसाले, फल, फूल और खान-पान से जुड़े उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाया जाना चाहिए।

किसान की आमदनी बढ़ाने के लिए उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात पर जोर देने का संकेत भी इस विजन में दिखाई दिया।

तीसरी शक्ति: टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को तीसरी शक्ति बताते हुए कहा कि दुनिया अब डेटा सेंटर, AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी के दौर में प्रवेश कर चुकी है। उभरती तकनीकें भारत के सामने चुनौती भी हैं और अवसर भी।उन्होंने भारत को इनोवेशन का ग्लोबल हब बनाने का आह्वान किया। भारत की डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

चौथी शक्ति: गति शक्ति

सप्तधारा की चौथी शक्ति ‘गति शक्ति’ है। प्रधानमंत्री ने देश में तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी को मजबूत करने की जरूरत बताई। शहरों को मेट्रो से जोड़ने, पोर्ट और पोर्ट-लैंड कनेक्टिविटी को मजबूत करने तथा लॉजिस्टिक्स को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।तेज कनेक्टिविटी को उद्योग और व्यापार की रीढ़ बताते हुए पीएम ने संकेत दिया कि भारत को ऐसी आधारभूत संरचना तैयार करनी होगी, जो उत्पादन से लेकर वैश्विक बाजार तक सामान पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज और किफायती बनाए।

पांचवीं शक्ति: रक्षा शक्ति

रक्षा क्षेत्र को सप्तधारा की पांचवीं शक्ति बताते हुए पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने डिफेंस में आत्मनिर्भरता की दिशा में अपनी क्षमता दुनिया को दिखाई है।साइबर सुरक्षा को भी आधुनिक रक्षा का अहम हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि आज हर घर के सामने साइबर सुरक्षा एक चुनौती बन रही है। इस क्षेत्र में देश की युवा शक्ति की प्रतिभा और तकनीकी सामर्थ्य का इस्तेमाल किया जा सकता है।

छठी शक्ति: ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी

छठी शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी को रखा। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक स्तर हासिल करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत केवल समस्याओं पर चर्चा करने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को समाधान देने की क्षमता रखने वाला मुल्क बन रहा है। ग्रीन मूवमेंट में भारत की भूमिका बढ़ाने की जरूरत है।ब्लू इकोनॉमी के लिए भारत की लंबी तटीय सीमा, मछली पालन, कोस्टल टूरिज्म और समुद्री तकनीक को बड़ी ताकत बताया गया। समुद्र से जुड़े संसाधनों और कारोबार के जरिए नए आर्थिक अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया।

सातवीं शक्ति: भारत की सॉफ्ट पावर

सप्तधारा की सातवीं और खास शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है। पीएम मोदी ने योग को दुनिया को भारत से जोड़ने वाली बड़ी ताकत बताया। इसके अलावा आध्यात्मिक केंद्र, आयुर्वेद, होलिस्टिक हेल्थकेयर, हैंडीक्राफ्ट, संस्कृति, फिल्म, गेमिंग, VFX, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट को भारत की वैश्विक पहचान मजबूत करने वाले क्षेत्र बताया।न्होंने कहा कि भारत को इन क्षेत्रों को वैश्विक सामर्थ्य में बदलना होगा। दुनिया भारत के World Audio Visual and Entertainment Summit का इंतजार करती है—यह भी भारत की बढ़ती क्रिएटिव ताकत का संकेत है।

प्रधानमंत्री ने आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिए बड़े कारोबारी लक्ष्य भी सामने रखे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में  भारत की 50 कंपनियां होनी चाहिए। दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में भारत का कम से कम एक बैंक होना चाहिए और भारतीय कंसल्टिंग तथा अकाउंटिंग फर्मों को भी वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करना चाहिए।प्रधानमंत्री के संबोधन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि भारत को सिर्फ बड़ा बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, कृषि, हरित अर्थव्यवस्था और संस्कृति की वैश्विक ताकत बनना होगा।

लाल किले से ‘सप्तधारा’ का यह आह्वान दरअसल उस भारत की तस्वीर पेश करता है, जो आत्मनिर्भरता को सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उसे मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सेमीकंडक्टर, किसान से लेकर AI और योग से लेकर ग्लोबल एंटरटेनमेंट तक हर मोर्चे पर अपनी ताकत में बदलना चाहता है।आने वाले 5-7 वर्षों को लेकर प्रधानमंत्री का संदेश साफ है अब भारत को रफ्तार भी चाहिए, सामर्थ्य भी और वैश्विक भरोसा भी। लक्ष्य सिर्फ दुनिया के बाजार में पहुंचना नहीं, बल्कि दुनिया के बाजार में भरोसेमंद भारतीय पहचान कायम करना है।