औरंगाबाद में क्रेडिट वॉर, NH-139 और मेडिकल कॉलेज पर सांसद अभय कुशवाहा की खुली चुनौती

Bihar News: औरंगाबाद में विकास योजनाओं के श्रेय को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ...

औरंगाबाद में क्रेडिट वॉर- फोटो : reporter

Bihar News: औरंगाबाद में विकास योजनाओं के श्रेय को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-139 को फोरलेन बनाने और मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर सांसद अभय कुशवाहा ने पूर्व सांसद पर तीखा हमला बोला है। अपने निजी आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता विकास योजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। सांसद ने इस मुद्दे पर आमने-सामने बहस की खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे गलत साबित हुए तो राजनीति छोड़ने के लिए तैयार हैं।

अभय कुशवाहा के इस बयान के बाद औरंगाबाद की सियासत में विकास कार्यों के श्रेय को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सांसद ने मेडिकल कॉलेज, एनएच-139 और बारुण में प्रस्तावित सोलर प्लांट को लेकर अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के मंत्रियों से लगातार मुलाकात की है।

औरंगाबाद के पाताल गंगा में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने को लेकर सांसद ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को राजनीतिक खींचतान से दूर रखा जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।अभय कुशवाहा ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को सरकारी अस्पतालों के अनुरूप जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परियोजना में सरकारी सुविधाएं नहीं मिलीं और आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं पहुंचा, तो वे आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। उनके मुताबिक, विकास परियोजनाओं की असली कसौटी जनता को मिलने वाली सुविधाएं हैं, न कि उनका राजनीतिक श्रेय।

राष्ट्रीय राजमार्ग-139 को फोरलेन बनाने की योजना को लेकर सांसद ने कहा कि उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इस मांग को उठाया था। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रयासों से परियोजना को मंजूरी मिलने की दिशा में काम आगे बढ़ा।पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह की ओर इशारा करते हुए अभय कुशवाहा ने कहा कि जो लोग इस परियोजना का श्रेय ले रहे हैं, वे उनके साथ सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने बहस करें। उन्होंने दावा किया कि यदि वे अपने तथ्यों को साबित नहीं कर पाए तो राजनीति छोड़ देंगे और चुनौती दी कि गलत साबित होने पर दूसरे पक्ष को भी ऐसा ही करना चाहिए।हालांकि, परियोजना की मंजूरी और उसमें विभिन्न जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित सरकारी दस्तावेजों से होना जरूरी है।

मुख्यमंत्री की सराहना किए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर सांसद ने कहा कि अच्छे कामों का समर्थन और गलत फैसलों का विरोध किया जाना चाहिए। उनके इस बयान को विकास योजनाओं के मुद्दे पर सरकार के साथ मुद्दा-आधारित सहयोग के रूप में देखा जा सकता है।वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री के नक्सलवाद समाप्त होने संबंधी बयान पर अभय कुशवाहा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है, तो कुछ नेताओं को अब भी भारी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने गृहमंत्री से ऐसे नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा करने की मांग की।सांसद के इस बयान ने सुरक्षा व्यवस्था और नक्सलवाद की स्थिति को लेकर भी बहस छेड़ दी है। हालांकि, किसी नेता को सुरक्षा दिए जाने के पीछे खतरे का आकलन और अन्य गोपनीय आधार हो सकते हैं।

औरंगाबाद में एनएच-139, मेडिकल कॉलेज और सोलर प्लांट जैसे मुद्दे अब विकास के साथ-साथ राजनीतिक श्रेय की बहस का हिस्सा बन गए हैं। सांसद अभय कुशवाहा ने अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए विरोधियों को खुली चुनौती दी है। अब इस सियासी टकराव में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही योजनाओं को लेकर किए जा रहे दावों की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

दीनानाथ की रिपोर्ट