Bihar News : औरंगाबाद में पाताल गंगा ट्रस्ट का अल्टीमेटम, कहा सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए दिया जमीन, प्राइवेट के लिए,मठाधीश बोले- वापस ले लेंगे

Bihar News : बिहार के औरंगाबाद जिले में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखा विवाद खड़ा हो गया है।

जमीन पर बवाल - फोटो : SOCIAL MEDIA

AURANGABAD : बिहार के औरंगाबाद जिले में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। यह पूरा मामला पाताल गंगा मठ से जुड़ा हुआ है, जहां के मठाधीश आदित्य ब्रह्मचारी और पाताल गंगा ट्रस्ट ने औरंगाबाद में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए सिविल सर्जन के नाम पर कुल 22 एकड़ जमीन दान दी है। इस दान की गई भूमि में 12 एकड़ 48 डिसमिल रैयती और 7 एकड़ गैरमजरूआ मालिक जमीन शामिल है।

भाजपा नेता का बड़ा खुलासा और सवाल

जैसे ही भूमि दान की यह खबर सार्वजनिक हुई, भाजपा नेता प्रवीण सिंह ने एक बड़ा खुलासा करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि 'प्रगति यात्रा' के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने औरंगाबाद में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की सार्वजनिक घोषणा की थी और इसके निर्माण के लिए 436 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी थी। प्रवीण सिंह ने तीखा सवाल किया कि जब यह जमीन पूरी तरह से सरकारी मेडिकल कॉलेज के नाम पर दान दी गई है, तो अब इसे पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर अस्पताल के रूप में संचालित करने की चर्चा क्यों की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि पूरे बिहार में पीपीपी मोड पर केवल एक मेदांता जैसा अस्पताल है, जहां आम और गरीब मरीजों का इलाज कराना बेहद कठिन होता है।

ट्रस्ट का कड़ा रुख: "सरकारी के लिए दिया है दान, प्राइवेट नहीं"

इस पूरे विवाद के गरमाने के बाद पाताल गंगा ट्रस्ट के सचिव, सदस्यों और मठाधीश ने मीडिया के सामने आकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्होंने यह जमीन केवल औरंगाबाद में सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए दान दी है, किसी प्राइवेट संस्थान के लिए नहीं। ट्रस्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे दान पत्र यानी डीड में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यदि यहां सरकारी कॉलेज नहीं बनाया गया, तो हम अपनी जमीन वापस ले लेंगे। यदि सरकार जनता को बरगलाने का प्रयास करेगी, तो देव की जनता इसे कभी सहन नहीं करेगी।

जनता में रोष और विधायक की सफाई

इस मुद्दे ने तूल पकड़ते हुए पूरे जिले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, जिससे स्थानीय लोगों में औरंगाबाद सदर के विधायक त्रिविक्रम सिंह के प्रति गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। जनता का आरोप है कि उनसे सरकारी मेडिकल कॉलेज का वादा किया गया था, लेकिन अब जनता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और वे पीपीपी मोड पर आधारित कॉलेज को किसी भी कीमत पर बनने नहीं देंगे। बढ़ते विरोध और तनाव को देखते हुए औरंगाबाद के विधायक ने पाताल गंगा मठ का दौरा किया। उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर स्थिति को संभालने की कोशिश की। विधायक का कहना है कि पीपीपी मोड को लेकर अभी तक सरकार की तरफ से कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिन 16 नए मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मोड के तहत लेने की बात कही जा रही है, उस सूची में औरंगाबाद का नाम शामिल नहीं है। फिलहाल स्थिति स्पष्ट होने के लिए अब सबको बिहार सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

दीनानाथ मौअआर की रिपोर्ट