Bihar School News: विद्यालय में कैद रहा छह साल का मासूम, स्कूल में ताला लगाकर चले गए गुरुजी

Bihar School News: सरकारी विद्यालयों में बच्चों की हिफाजत और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर बांका जिले में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है।

शिक्षकों की घोर लापरवाही- फोटो : reporter

Bihar School News: सरकारी विद्यालयों में बच्चों की हिफाजत और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर बांका जिले में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां शिक्षकों की कथित लापरवाही का खामियाजा छह साल के मासूम को भुगतना पड़ा। स्कूल की छुट्टी होने के बाद शिक्षक विद्यालय में ताला लगाकर अपने घर चले गए, लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं हुआ कि कक्षा तीन का एक बच्चा कमरे के अंदर ही सो रहा है। करीब दो घंटे तक मासूम विद्यालय के भीतर कैद रहा। उसकी रोने और चीखने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे सुरक्षित बाहर निकलवाया। घटना के बाद गांव में नाराजगी का माहौल है।

बेंच पर सोता रह गया मासूम, ताला लगाकर चले गए शिक्षक

मामला नवसृजित प्राथमिक विद्यालय घोरेला कैरी का है। जानकारी के मुताबिक, पीलुआ गांव निवासी निरंजन महतो का छह वर्षीय पुत्र करण कुमार इन दिनों घोरेला कैरी गांव में अपने फूफा विकास चौधरी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। बुधवार को वह रोजाना की तरह विद्यालय पहुंचा था। स्कूल में पढ़ाई के बाद छुट्टी हुई। उस वक्त प्रधानाध्यापक अवकाश पर थे। आरोप है कि सहायक शिक्षकों ने विद्यालय बंद करने से पहले सभी कक्षाओं का मुआयना नहीं किया। कक्षा की बेंच पर सो रहे करण को नजरअंदाज कर स्कूल में ताला लगा दिया और सभी शिक्षक वहां से चले गए।

घर नहीं पहुंचा बच्चा तो परिजनों की बढ़ी बेचैनी

छुट्टी के काफी देर बाद भी जब करण घर नहीं लौटा तो परिजन परेशान हो उठे। उन्होंने आसपास और गांव में उसकी तलाश शुरू कर दी। इसी दरम्यान विद्यालय के भीतर से बच्चे के रोने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर ग्रामीण स्कूल की ओर दौड़े। वहां पहुंचने पर पता चला कि मासूम अंदर बंद है। इसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई।

शिक्षिका को फोन करने पर भी ग्रामीणों में नाराजगी

ग्रामीणों विकास कुमार, शंकर कापरी, पवन चौधरी, रजनीश कुमार और मित्तल मंडल समेत अन्य लोगों ने बताया कि विद्यालय की एक महिला शिक्षिका को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद शिक्षिका ने फौरन मौके पर पहुंचकर बच्चे को बाहर निकालने की पहल नहीं की। उन्होंने चाबी लेकर आने की बात कही और फोन काट दिया। शिक्षिका के इस कथित रवैये से ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी गई।

दो घंटे बाद खुला ताला, सहमे हुए बच्चे को निकाला बाहर

मामले की जानकारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी गौरव कुमार को भी दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब दो घंटे तक विद्यालय के अंदर बंद रहने के बाद एक सहायक शिक्षक मौके पर पहुंचे और ताला खोलकर बच्चे को बाहर निकाला। काफी देर तक अंधेरे और बंद कमरे में रहने के कारण करण बुरी तरह सहम गया था। मासूम के बाहर आते ही परिजनों ने राहत की सांस ली।

बीईओ ने दिए जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश

संबंधित सहायक शिक्षक ने सफाई देते हुए कहा कि प्रधानाध्यापक के अवकाश पर रहने के कारण वे विद्यालय बंद कर घर चले गए थे। बेंच पर सो रहे बच्चे पर उनकी नजर नहीं पड़ी। वहीं, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी गौरव कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी शिक्षक दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों की सुरक्षा में ऐसी चूक क्यों?

इस घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था और शिक्षकों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि विद्यालय में ताला लगाने से पहले प्रत्येक कक्षा की जांच क्यों नहीं की गई? बच्चों की हाजिरी और उनकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करना आखिर किसकी जिम्मेदारी है? ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जिंदगी इस तरह खतरे में न पड़े।

रिपोर्ट- चंद्रशेखर भगत