FIR Against Pappu Yadav: मणिकर्णिका घाट की फेक तस्वीरें शेयर करने के मामले में पप्पू यादव पर केस दर्ज, भड़के सांसद ने कहा- वह डरने वाले नहीं है

सांसद पप्पू यादव ने तल्ख लहजे में कहा कि पप्पू यादव न किसी से डरा है और न कभी डरेगा। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट से जुड़े सवाल कई लोगों ने उठाए हैं और ये सवाल जायज हैं।...

मणिकर्णिका घाट मामले में केस दर्ज होने पर भड़के पप्पू यादव- फोटो : reporter

FIR Against Pappu Yadav: काशी की आत्मा माने जाने वाले मणिकर्णिका घाट पर अब आस्था के साथ-साथ सियासत की तपिश भी महसूस की जा रही है। घाट के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से फर्जी और भ्रामक सामग्री फैलाने के आरोप में पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस सूची में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का नाम शामिल होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

मणिकर्णिका घाट, जहां चिता की अग्नि कभी बुझती नहीं और जहां अंतिम संस्कार को मोक्ष का द्वार माना जाता है, वही घाट अब आरोप–प्रत्यारोप और मुकदमों का मैदान बन गया है। पुलिस का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर AI से तैयार की गई तस्वीरें और वीडियो साझा किए गए, जिनमें घाट से जुड़े मंदिरों को तोड़े जाने का दावा किया गया। प्रशासन का कहना है कि यह सामग्री न सिर्फ भ्रामक थी, बल्कि इसका मकसद धार्मिक भावनाओं को आहत करना, जनता को भड़काना और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना था।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस गौरव बंसल के मुताबिक, आठ अलग-अलग मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज किए गए हैं। ये सभी मामले मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और श्मशान सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से जुड़े हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि किन X हैंडल्स से यह सामग्री फैलाई गई और इसके पीछे किसकी मंशा थी।

मामला दर्ज होने के बाद कटिहार में प्रतिक्रिया देते हुए सांसद पप्पू यादव ने तल्ख लहजे में कहा कि पप्पू यादव न किसी से डरा है और न कभी डरेगा। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट से जुड़े सवाल कई लोगों ने उठाए हैं और ये सवाल जायज हैं। “अगर सवाल पूछना गुनाह है, तो मैं यह गुनाह करता रहूंगा,” उनके बयान में सियासी चुनौती साफ झलकती है। एफआईआर को उन्होंने डराने की कोशिश बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों से वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।

साफ है कि मोक्ष की नगरी में यह टकराव सिर्फ घाट के पत्थरों का नहीं, बल्कि आस्था, अभिव्यक्ति और सत्ता के बीच खिंची लकीर का है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला कानून के दायरे में सिमटता है या सियासी आग और भड़कती है