नवादा में 50 फीट के रावण और 45 फीट के मेघनाद का हुआ दहन: हरिश्चंद्र स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब, बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश

नवादा के हरिश्चंद्र स्टेडियम में भव्य रावण वध कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत उल्लास और श्रद्धा के साथ किया गया। इस वर्ष आयोजन स्थल पर 50 फीट ऊंचे रावण और 45 फीट ऊंचे मेघनाद के भव्य पुतलों का निर्माण कराया गया था....

नवादा में 50 फीट के रावण और 45 फीट के मेघनाद का हुआ दहन- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : जिले में विजयादशमी के पावन अवसर पर हरिश्चंद्र स्टेडियम में भव्य रावण वध कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत उल्लास और श्रद्धा के साथ किया गया। कई वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु और आम नागरिक स्टेडियम पहुंचे। इस वर्ष आयोजन स्थल पर 50 फीट ऊंचे रावण और 45 फीट ऊंचे मेघनाद के भव्य पुतलों का निर्माण कराया गया था। आतिशबाजी और श्रीराम के जयकारों के बीच रावण दहन कर समाज को असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का अमर संदेश दिया गया।


पूर्व अध्यक्ष संजय साव बने मुख्य अतिथि, प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में हुआ आयोजन

हरिश्चंद्र स्टेडियम में आयोजित इस रावण वध कार्यक्रम में नवादा के पूर्व अध्यक्ष संजय साव मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे। रावण के अंत की प्रतीकात्मक रस्म में उनकी मुख्य भूमिका रही। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कड़े इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम स्थल पर नवादा के जिला पदाधिकारी (DM) रवि प्रकाश, पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव धीमान, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अमित अनुराग और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) हुलास कुमार समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी लगातार मुस्तैद रहे।


सुरक्षा को लेकर अलर्ट रहा प्रशासन, उमड़ी लाखों की भीड़

आयोजन के दौरान उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए स्टेडियम और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा बल तैनात किया गया था। जिला प्रशासन की चौकस निगरानी के कारण पूरा कार्यक्रम बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ। अधिकारियों की सक्रियता से बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा और सभी ने सुगम तरीके से रावण दहन के भव्य दृश्य का आनंद लिया।


रावण दहन देता है अधर्म, अहंकार और अन्याय के अंत की प्रेरणा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंकापति रावण महाज्ञानी और पराक्रमी होने के बावजूद अपने अहंकार व अधर्म के रास्ते पर चलने के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर संसार में धर्म, न्याय और सत्य की पुनरस्थापना की थी। हर साल विजयादशमी पर रावण का पुतला जलाकर इसी पौराणिक प्रसंग को दोहराया जाता है। नवादा के हरिश्चंद्र स्टेडियम में आयोजित यह रावण दहन कार्यक्रम भी समाज को यही सीख देता है कि इंसान कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अनैतिकता और अधर्म का अंत सदैव निश्चित होता है।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट