नवादा के रेलवे कॉलोनी में मां दुर्गा का पट खुलते ही उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, बंगाली रीति-रिवाज से होती है पूजा

नवादा के रेलवे कॉलोनी में मां दुर्गा का खुला पट - फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : शहर के ऐतिहासिक रेलवे कॉलोनी में शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा का पट खुलते ही दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। पट खुलते ही पूरा क्षेत्र माता के जयकारों और भक्तिमय गीतों से गूंज उठा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा पंडाल में पहुंचकर मां दुर्गे के दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की कामना कर रहे हैं। रेलवे कॉलोनी की यह दुर्गा पूजा आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।


महिलाएं खुद गाती हैं पारंपरिक भक्ति गीत, संस्कृति का दिखता है अनूठा संगम

इस पूजा की सबसे बड़ी और खास विशेषता यह है कि यहां आज भी पूरी तरह से पुरानी परंपराओं और विधानों का पालन किया जाता है। यहां बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान स्थानीय महिलाएं खुद आगे आकर मां दुर्गा के पारंपरिक और पावन भक्ति गीत गाती हैं। महिलाओं के सामूहिक और मधुर स्वरों में गूंजने वाले ये माता रानी के गीत पूरे पंडाल के माहौल को अत्यधिक आध्यात्मिक और जीवंत बना देते हैं।


चंद्रिका यादव ने साझा की परंपराओं की जानकारी

इस संबंध में जानकारी देते हुए चंद्रिका यादव ने बताया कि रेलवे कॉलोनी में षष्ठी पूजा के पावन दिन ही बंगाली रीति-रिवाज के तहत मां दुर्गा का पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है। इसी परंपरा के साथ यहां दर्शन-पूजन का विधिवत सिलसिला शुरू होता है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक तौर-तरीकों से होने वाले इस आयोजन में महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लेती हैं और अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखे हुए हैं।


श्रद्धालुओं में भारी उत्साह, आस्था से सराबोर हुआ पूरा इलाका

पट खुलने के साथ ही जिस प्रकार भक्तों की भीड़ उमड़ी है, उससे साफ जाहिर है कि लोगों में इस पूजा को लेकर कितना उत्साह है। मां के दर्शन के साथ-साथ यहां की अनूठी बंगाली परंपराओं को देखने और अनुभव करने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। रेलवे कॉलोनी की यह पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का भी एक बेहतरीन केंद्र बन चुकी है।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट