जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों का उग्र प्रदर्शन, डीएम कार्यालय का घेराव करने पहुंचे किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया

नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के मधुबन-मोतनाजे गांव में प्रस्तावित डैम निर्माण का विरोध हो रहा है। डैम के लिए किये जा रहे जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान डीएम कार्यालय का घेराव करने निकले....

नवादा में जमीन अधिग्रहण का विरोध- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : जिले में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। नारदीगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाले मधुबन-मोतनाजे गांव में प्रस्तावित डैम निर्माण के लिए की जा रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में किसान समाहरणालय (डीएम कार्यालय) का घेराव और धरना-प्रदर्शन करने पहुंचे थे। हालांकि, प्रदर्शन शुरू होने से ठीक पहले पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई प्रमुख प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और वाहनों में बैठाकर वहां से हटा दिया।


उचित मुआवजे की मांग और पुरानी अनदेखी का आरोप

आंदोलित किसानों का मुख्य कहना है कि डैम निर्माण के लिए जिन रैयतों की जमीन ली जा रही है, उन्हें सरकार और प्रशासन द्वारा उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पूर्व के समय में भी संबंधित क्षेत्र के कई किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन के बदले समय पर और सही मुआवजा नहीं मिला है। किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन का न्यायसंगत और उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक उन्हें उनकी भूमि से जबरन बेदखल नहीं किया जाना चाहिए।


राजद नेता अशोक महतो और सांसद सुधाकर सिंह का मिला समर्थन

किसानों के इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की विधायक अनीता देवी के पति और राजद नेता अशोक महतो ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। इसके अलावा, मौके पर पहुंचे सांसद सुधाकर सिंह ने भी किसानों की मांगों का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सांसद और अन्य नेताओं से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।


प्रशासनिक कार्रवाई से रुका प्रदर्शन, समाधान पर टकी नजरें

किसानों की योजना डीएम कार्यालय का घेराव करने की थी, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा घेरे के कारण प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ सके। इस कार्रवाई के बाद से किसानों और प्रशासन के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि जिला प्रशासन किसानों की इन जायज मांगों पर क्या रुख अपनाता है और भूमि अधिग्रहण व मुआवजे के पेंच को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट