Magahi Mahotsav : मगही लघु फिल्म महोत्सव में 48 लघु फिल्मों की एंट्री, ‘दोस्ती’ को मिला प्रथम पुरस्कार
Magahi Mahotsav : पटना में आयोजित मगही लघु film महोत्सव में 48 लघु फिल्मों की इंट्री हुई है. जिसमें दोस्ती को प्रथम पुरस्कार मिला है........पढ़िए आगे
PATNA : मगही कनेक्शन के तत्वावधान में मगही भाषा और संस्कृति को देने के उद्देश्य से आयोजित मगही महोत्सव के दूसरे दिन मगही फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दरम्यान मगही लघु फिल्म निर्माण प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। दिसंबर 2025 में घोषित इस प्रतियोगिता में कुल 48 फिल्मों की प्रविष्टि आई थी। प्रतियोगिता के लिए निर्णायक मंडल में प्रसिद्ध फिल्म पटकथा लेखक शैबाल, बॉलीवुड फिल्मों के निर्देशक अभिलाष शर्मा और फिल्म अभिनेता बुल्लू कुमार शामिल रहे। प्रतियोगिता में सामाजिक सरोकारों पर आधारित फिल्मों ने खास प्रभाव छोड़ा। प्रथम पुरस्कार ‘दोस्ती’ फिल्म को दिया गया, जो एक साधारण गांव की पृष्ठभूमि में लड़कियों की शिक्षा के महत्व को दर्शाती है। द्वितीय स्थान महिलाओं पर केंद्रित फिल्म ‘एक कप चाह’ को मिला, जबकि तृतीय स्थान भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित फिल्म ‘आशाएं’ को दिया गया। इसके अलावा ' लॉस्ट', ‘शहर से निमन गांव’ और ‘बनकहि’ को प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लघु फिल्म के विजेताओं को प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार राजेश रंजन, वरिष्ठ फ़िल्म पटकथा लेखक शैबाल जी, स्वाहा फ़िल्म के निर्देशक अभिलाष शर्मा, पाहुन हॉलीडेज के आदित्य, मगही महोत्सव के रविशंकर उपाध्याय, विजेता चंदेल व विद्या सागर ने सम्मानित किया।
गया घराने की परंपरा और संगीत पर चर्चा
महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत गया घराने के इतिहास पर आधारित बातचीत और गायकी के कार्यक्रम से हुई। गया घराने के प्रसिद्ध गायक राजन सिजुआर ने कहा कि पुरबिया गायकी में ठुमरी की चर्चा गया घराने के बिना अधूरी है। उन्होंने हारमोनियम वादन में सोनी के योगदान को भी विशेष बताया और कहा कि उन्होंने वादन की एक अलग शैली विकसित की। राजन ने सुझाव दिया कि बिहार के हर प्रमंडल में संगीत शिक्षा के लिए गुरुकुल खोले जाने चाहिए, जहां बच्चों को छात्रवृत्ति देकर विभिन्न संगीत विधाओं की शिक्षा दी जा सके, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत संरक्षित रह सके।
मगही फिल्मों के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर विमर्श
पहले सत्र में मगही फिल्मों के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रख्यात अभिनेता अली खान ने कहा कि मगही सिनेमा को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है और अधिक से अधिक लोगों को इससे जुड़ना चाहिए। शैबाल ने जानकारी दी कि पहली मगही फिल्म 1961 में ‘भैया’ बनी थी। इसके बाद लंबे अंतराल के बाद ‘देवन मिसिर’ और ‘स्वाहा’ जैसी फिल्में बनीं, लेकिन इस क्षेत्र में निरंतरता बनाए रखने की जरूरत है।
मगही का समृद्ध इतिहास
फिल्म इतिहासकार प्रो. रविकांत ने कहा कि मगही का इतिहास समृद्ध रहा है और अब जब एआई का दौर आ रहा है, तो हमें अपनी भाषा के कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ाना होगा, ताकि भविष्य में भी मगही की मजबूत उपस्थिति बनी रहे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे निराला ने बताया कि मगही में फिल्म निर्माण की शुरुआत 1900 के आसपास ही हो गई थी। उन्होंने कहा कि 1930 में देव के राजा ने इंग्लैंड से उपकरण मंगवाकर छठ महापर्व पर मगही में फिल्म बनाई थी, लेकिन संरक्षण के अभाव में वह अब उपलब्ध नहीं है। महोत्सव ने न केवल नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि मगही भाषा, संस्कृति और सिनेमा के विकास की दिशा में ठोस पहल का संदेश भी दिया।