बिहार में अगले 48 घंटे राहत से आफत तक, कहीं झमाझम बारिश तो कहीं सूखे के हालात, पटना में छाता लेकर निकलें
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटों में उत्तर बिहार के जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। पटना में 30 जुलाई को सामान्यतः बादल छाए रहेंगे और एक-दो दौर की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
Bihar Weather : बिहार में मानसून की रफ्तार अभी भी असमान बनी हुई है। एक ओर राज्य के कई जिलों में पिछले 24 से 48 घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, वहीं दक्षिण और मध्य बिहार के कई हिस्से अब भी पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 30 जुलाई और इसके बाद के 48 घंटों के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ जिलों में तेज हवा चलने की संभावना है। हालांकि पूरे राज्य में एक समान और व्यापक बारिश के संकेत अभी भी नहीं हैं।
राजधानी पटना में पिछले दो दिनों के दौरान मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई इलाकों में बादल छाए रहे, लेकिन व्यापक बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार पटना में 30 जुलाई को सामान्यतः बादल छाए रहेंगे और एक-दो दौर की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। 31 जुलाई को हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि उमस लोगों को परेशान कर सकती है।
सीमांचल सहित इन जिलों में बारिश
पिछले 24 से 48 घंटों के दौरान उत्तर और पूर्वी बिहार के कुछ हिस्सों, विशेषकर किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। वहीं कोसी और सीमांचल क्षेत्र के कई स्थानों पर गरज के साथ वर्षा हुई, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आई। इसके विपरीत गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, नालंदा, बांका और जमुई जैसे दक्षिण बिहार के जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम रही, जिससे खेतों में नमी की कमी बनी हुई है।
अगले 48 घंटे अहम
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटों में उत्तर बिहार के जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और तेज हवा चलने की भी आशंका है। मध्य और दक्षिण बिहार में भी छिटपुट बारिश के आसार हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की रोपनी और फसल को बचाने के लिए अधिक व्यापक और लगातार वर्षा की जरूरत है।
धान रोपनी पर असर
कमजोर मानसून का सबसे अधिक असर खेती पर दिखाई दे रहा है। राज्य में धान की रोपनी अब भी लक्ष्य से काफी पीछे है और कई जिलों में खेत सूखने लगे हैं। किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि रोपनी का काम पूरा हो सके और पहले से रोपी गई फसल को पर्याप्त पानी मिल सके।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचें। किसानों को भी मौसम के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। फिलहाल पूरे बिहार की निगाहें अगले दो दिनों की बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि यही बारिश खरीफ फसलों, खासकर धान की खेती के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।