Bihar Politics: 20 जुलाई से बिहार विधानसभा मानसून सत्र , सियासी संग्राम तय, विपक्ष के हमलों से घिरेगी सम्राट सरकार
Bihar Politics: बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई तक चल सकता है, और इस छोटे लेकिन बेहद अहम सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं।....
Bihar Politics: बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई तक चल सकता है, और इस छोटे लेकिन बेहद अहम सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई सरकार का यह पहला बड़ा विधानसभा इम्तिहान माना जा रहा है, जहां 50 हजार करोड़ रुपये के विशाल अनुपूरक बजट को सदन के पटल पर रखा जाएगा। वित्त मंत्री बिजेन्द्र यादव इस बजट को पेश करेंगे, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सेक्टरों पर खास जोर दिए जाने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक यह अनुपूरक बजट वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार की विकास योजनाओं को गति देने और लंबित परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। यह अब तक का एक बड़ा वित्तीय दस्तावेज माना जा रहा है, जो सरकार की प्राथमिकताओं और आर्थिक रणनीति की दिशा तय करेगा।सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि के साथ होगी। उसी दिन अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इसके बाद 21 और 22 जुलाई को राजकीय कार्य और विधेयकों पर चर्चा होगी, जबकि 23 जुलाई को अनुपूरक व्यय विवरणी पर विस्तार से बहस और सरकार का जवाब होगा। अंत में 24 जुलाई को गैर-सरकारी संकल्पों और अन्य विधायी कार्यों का निपटारा किया जाएगा।
हालांकि इस बार का सत्र सिर्फ विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि यह पूरी तरह सियासी टकराव का अखाड़ा बनने जा रहा है। विपक्ष ने पहले ही सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। एनकाउंटर मामलों, बढ़ते अपराध, और कथित टेंडर घोटालों को लेकर विपक्ष सदन में सरकार पर तीखा हमला बोलने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सत्र सत्ता और विपक्ष के बीच कड़े टकराव का गवाह बन सकता है।
उधर सरकार के भीतर भी नई ऊर्जा और चुनौतियों का मिश्रण देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में 29 अहम एजेंडों पर मुहर लगी थी, जिसमें टोल टैक्स निर्धारण, सड़क निर्माण, पर्यटन, शिक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। इसे सरकार की ‘फास्ट ट्रैक डेवलपमेंट पॉलिसी’ के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले 3 फरवरी 2026 को राज्य का बजट पेश किया गया था, जिसका आकार 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये था जो अब तक का सबसे बड़ा बजट माना गया। उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे, लेकिन अब सत्ता परिवर्तन के बाद पहला अनुपूरक बजट सम्राट चौधरी सरकार की नीतिगत दिशा को नए सिरे से परिभाषित करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सत्र केवल बजट या विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सरकार की राजनीतिक स्थिरता, विपक्ष की एकजुटता और प्रशासनिक प्रदर्शन की असली परीक्षा भी साबित होगा। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 50 हजार करोड़ के इस अनुपूरक बजट पर सदन में किस तरह की सियासी तल्खी देखने को मिलती है।