नितिन नबीन के लिए नया प्रोटोकॉल, BJP के वरिष्ठ नेताओं को मिला नाम से बुलाने से परहेज की नसीहत, पद की गरिमा का आदेश

BJP President Nitin Nabin: सांगठनिक बदलावों के बाद भाजपा ने साफ कर दिया है कि अब रिश्तों की रवायत नहीं, बल्कि ओहदे की इज़्ज़त सबसे ऊपर होगी।...

नितिन नबीन के लिए नया प्रोटोकॉल- फोटो : social Media

BJP President Nitin Nabin:  भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक गलियारों में इन दिनों सियासत की हवा कुछ बदली-बदली सी है। हालिया सांगठनिक बदलावों के बाद भाजपा ने साफ कर दिया है कि अब रिश्तों की रवायत नहीं, बल्कि ओहदे की इज़्ज़त सबसे ऊपर होगी। यह पैग़ाम सिर्फ़ दिल्ली के दफ़्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ से लेकर ज़मीनी कार्यकर्ताओं तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के मनोनयन के साथ ही पार्टी ने ‘प्रोटोकॉल’ को लेकर सख़्त लहजा अख़्तियार किया है। उम्र और तजुर्बे में कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे होने के बावजूद, अब यह साफ़ कर दिया गया है कि बातचीत में नाम लेकर संबोधन नहीं, बल्कि पद की गरिमा के मुताबिक़ अल्फ़ाज़ इस्तेमाल होंगे। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठन में अनुशासन तभी कायम रहेगा, जब ज़ुबान भी तालीमशुदा और तहज़ीबदार होगी।

सूत्रों की मानें तो यह सख़्ती महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले दिनों की सियासी रणनीति का हिस्सा है। नितिन नबीन के जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की संभावनाओं के बीच पार्टी किसी भी तरह का ढीलापन नहीं छोड़ना चाहती। साफ़ संदेश है जो कल तक दोस्ती के हवाले से चल रहा था, वह अब दस्तूर और दस्तावेज़ के मुताबिक़ चलेगा।

दिलचस्प बात यह है कि तमाम सख़्ती और निर्देशों के बीच नितिन नबीन की सादगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वे आज भी अपने वरिष्ठों से उसी अदब और सम्मान के साथ मिलते हैं, जो पार्टी की पुरानी संस्कृति का हिस्सा रहा है। शायद यही वजह है कि भाजपा यह दिखाना चाहती है कि अनुशासन और विनम्रता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि संगठन की मज़बूती की दो मज़बूत कड़ियां हैं।

कुल मिलाकर, भाजपा की इस नई कार्यशैली ने यह साफ़ कर दिया है कि आने वाले सियासी दौर में नज़्म, नसीहत और निज़ाम तीनों का इम्तिहान एक साथ होगा।