Bihar News: 300 साल पुराना रहस्य! छपरा में लकड़ी से बनी मां की अनोखी प्रतिमा, जोड़ ढूंढते रह जाएंगे आप

Bihar News: मां काठ वाली देवी की अनूठी प्रतिमा, तीन सदियों से कायम है आस्था,नीम के पेड़ और पुजारी के सपने से जुड़ी है स्थापना की कथा

मां काठ वाली देवी की अनूठी प्रतिमा- फोटो : reporter

Bihar News: छपरा शहर के कटरा मोहल्ले में आस्था और परंपरा का एक ऐसा अनूठा संगम मौजूद है, जिसकी कहानी सुनकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं। यहां विराजमान मां काठ वाली देवी की प्रतिमा आम देवी प्रतिमाओं से बिल्कुल अलग बताई जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रतिमा लकड़ी से निर्मित है, लेकिन इसमें कहीं भी जोड़ दिखाई नहीं देने की मान्यता है। करीब तीन सौ साल पुरानी बताई जाने वाली इस प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था है। वहीं, इसके निर्माण से जुड़ी लोककथा आज भी लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है।

पुजारी के सपने में आईं माता, फिर नीम के पेड़ से बनी प्रतिमा!

स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, करीब तीन सौ वर्ष पहले कटरा मोहल्ले में उस जगह एक विशाल नीम का पेड़ हुआ करता था, जहां आज मां काठ वाली देवी का मंदिर स्थित है। जनश्रुति के अनुसार, एक रात माता ने वहां रहने वाले पुजारी को सपने में दर्शन दिए और उसी नीम के पेड़ की लकड़ी से अपनी प्रतिमा बनवाने का निर्देश दिया।कहा जाता है कि माता के इस स्वप्नादेश के बाद पुजारी ने एक बढ़ई को बुलाया। इसके बाद नीम के पेड़ को कटवाकर उसकी लकड़ी से देवी की प्रतिमा तैयार कराई गई। स्थानीय लोग इसी घटना को मंदिर की स्थापना से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, इस कथा की ऐतिहासिक पुष्टि करने वाले स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही यह मान्यता आज भी मंदिर की पहचान का अहम हिस्सा है।

लकड़ी की प्रतिमा में जोड़ नहीं होने का दावा, बनावट देखकर चकित होते हैं श्रद्धालु

मां काठ वाली देवी की प्रतिमा की सबसे विशिष्ट पहचान उसका लकड़ी से निर्मित होना और उसमें जोड़ दिखाई नहीं देने की स्थानीय मान्यता है। आम तौर पर लकड़ी की मूर्तियां अलग-अलग हिस्सों को तराशकर और जोड़कर बनाई जाती हैं। लेकिन इस प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास प्रचलित है कि इसकी बनावट में जोड़ का नामोनिशान नहीं दिखता।यही खासियत इस देवी स्थल को दूसरी जगहों से अलग पहचान दिलाती है। प्रतिमा के निर्माण की कथा और उसकी अनूठी बनावट लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा करती है। श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ इस प्राचीन प्रतिमा से जुड़ी मान्यताओं को भी जानने की उत्सुकता रखते हैं।

तीन सदियों से कायम है आस्था, छपरा की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा

कटरा मोहल्ले का यह देवी स्थल केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि छपरा की लोकआस्था और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। यहां प्रचलित कथा बताती है कि किस तरह धार्मिक विश्वास और लोकपरंपराएं किसी स्थान को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

मां काठ वाली देवी की प्रतिमा, नीम के पेड़ से जुड़ी स्थापना की कहानी और बिना जोड़ की अनूठी बनावट इस मंदिर को खास बनाती हैं। करीब तीन सौ वर्षों की बताई जाने वाली परंपरा के साथ यह स्थल आज भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। इतिहास के प्रमाण भले ही इस लोककथा की हर कड़ी की पुष्टि न करते हों, लेकिन लोगों की मान्यताओं में मां काठ वाली देवी का स्थान बेहद खास है। यही वजह है कि छपरा का यह प्राचीन देवी स्थल आज भी आस्था, रहस्य और परंपरा की अनूठी कहानी सुनाता है।

रिपोर्ट-धर्मेंद्र रस्तोगी