Bihar MLC Election: सारण शिक्षक MLC चुनाव, रणधीर सिंह की साख दांव पर, आनंद पुष्कर की जीत के लिए संभाली कमान

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद के 03-सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।...

सारण शिक्षक MLC चुनाव- फोटो : reporter

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद के 03-सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर के पक्ष में चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे मांझी के जदयू विधायक रणधीर सिंह की भूमिका पर सबकी निगाहें टिकी हैं। पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के पुत्र रणधीर सिंह के लिए यह चुनाव अपनी संगठनात्मक क्षमता, राजनीतिक सूझबूझ और शिक्षक मतदाताओं के बीच समर्थन जुटाने के कौशल को परखने का अवसर है। हालांकि, इस चुनाव का उनकी व्यक्तिगत सियासी साख पर कितना असर पड़ेगा, यह नतीजों और आगे पार्टी के भीतर बनने वाली परिस्थितियों से ही स्पष्ट होगा।

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में शिक्षक मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। ऐसे में प्रत्याशियों के लिए केवल राजनीतिक रसूख और सामाजिक समीकरणों के सहारे चुनावी नैया पार लगाना आसान नहीं होगा। मतदाताओं के बीच व्यक्तिगत पहुंच, उनकी समस्याओं को लेकर सक्रियता, प्रत्याशी की स्वीकार्यता और बूथ स्तर पर चुनावी प्रबंधन भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

प्रभुनाथ सिंह की राजनीतिक विरासत की होगी परीक्षा

सारण और उत्तर बिहार की सियासत में पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह का लंबे समय तक प्रभाव रहा है। उनकी राजनीतिक विरासत और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संपर्क को देखते हुए रणधीर सिंह की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आनंद पुष्कर के समर्थन में चुनावी कमान संभालकर रणधीर सिंह ने अपनी राजनीतिक सक्रियता का परिचय दिया है। हालांकि, पिता की राजनीतिक पहचान का कितना लाभ मौजूदा चुनाव में मिलेगा, इसका फैसला शिक्षक मतदाताओं का रुख ही करेगा। पुराने सियासी समीकरणों के साथ वर्तमान जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दे भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

राहुल राज की दावेदारी से बढ़ी चुनावी सरगर्मी

इस चुनाव में भाजपा से निलंबित रिविलगंज के प्रखंड प्रमुख राहुल राज के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरने से मुकाबले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उनकी उम्मीदवारी के बाद राजपूत समाज के मतदाताओं के संभावित रुख पर भी राजनीतिक हलकों में नजर रखी जा रही है। हालांकि, केवल जातीय पहचान के आधार पर किसी समाज के मतदाताओं के मतदान व्यवहार का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। राहुल राज की वास्तविक चुनावी पकड़ और उन्हें मिलने वाले समर्थन का आकलन मतदान के रुझान तथा परिणामों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

नतीजों से खुलेगा चुनावी रणनीति का हिसाब

आनंद पुष्कर के पक्ष में समर्थन जुटाना रणधीर सिंह के सामने बड़ी चुनौती है। यदि जदयू प्रत्याशी को अपेक्षित समर्थन मिलता है, तो इसे उनके चुनावी प्रबंधन की सफलता के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं, परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं रहने पर रणनीति और संगठनात्मक प्रयासों की समीक्षा की चर्चा हो सकती है। हालांकि, किसी एक चुनाव के नतीजे को किसी नेता की पूरी राजनीतिक क्षमता या पारिवारिक विरासत का अंतिम पैमाना मानना सही नहीं होगा। फिलहाल, सारण शिक्षक एमएलसी चुनाव में सबकी निगाहें प्रत्याशियों के प्रदर्शन, शिक्षक मतदाताओं की प्राथमिकताओं और रणधीर सिंह की चुनावी रणनीति पर टिकी हैं।

रिपोर्ट- धर्मेंद्र रस्तोगी