sugar price: दिवाली से पहले चीनी की कीमतों में उछाल, एक महीने में 4 रुपये से ज्यादा महंगी, जानें कितनी हो जाएगी कीमत

sugar price: दिवाली से पहले चीनी का औसत खुदरा भाव 59.50 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। एक महीने में 4 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। जानें कोलकाता, दिल्ली और मुंबई में चीनी के दाम।

sugar price: दिवाली से पहले चीनी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक महीने में खुदरा और थोक बाजार में चीनी के दाम 4 रुपये प्रति किलो से ज्यादा बढ़ गए हैं। 8 नवंबर 2026 को दिवाली मनाई जाएगी। ऐसे में त्योहार से पहले मिठाइयों और पकवानों के लिए चीनी की बढ़ती कीमतों से आम लोगों का खर्च बढ़ सकता है।


उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 59.50 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। वहीं, थोक बाजार में इसकी औसत कीमत 55.40 रुपये प्रति किलो है। एक साल पहले खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव 46.50 रुपये और थोक भाव 43.23 रुपये प्रति किलो था। इस तरह एक साल में चीनी की कीमत करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलो बढ़ गई है। 


कोलकाता में चीनी सबसे महंगी


3 नवंबर 2026 को देश के प्रमुख शहरों में चीनी के खुदरा भाव इस प्रकार रहे। कोलकाता में चीनी 65 रुपये प्रति किलो बिकी, जबकि दिल्ली में इसका भाव 64 रुपये और मुंबई में 61 रुपये प्रति किलो रहा।


एक साल पहले कोलकाता में चीनी की कीमत 50 रुपये प्रति किलो थी। वहीं, दिल्ली में 46 रुपये और मुंबई में 45 रुपये प्रति किलो थी। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े शहरों में भी चीनी के दाम में काफी बढ़ोतरी हुई है। 

क्यों बढ़ रहे हैं चीनी के दाम?


चीनी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह पिछले सीजन में उत्पादन का अनुमान से कम रहना है। इसके अलावा गन्ने की फसल पर रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों तथा अधिक बारिश से जलभराव का असर पड़ा। इससे गन्ने की पैदावार प्रभावित हुई।


त्योहारों के समय मिठाइयों और दूसरे पकवानों की मांग बढ़ने से भी चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसके साथ ही दुनिया के बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होने और कुछ कारोबारियों की ओर से स्टॉक जमा करने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है। सरकार ने भी चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कम उत्पादन, फसल को नुकसान, वैश्विक बाजार में कम उपलब्धता और जमाखोरी जैसे कारण बताए हैं। 


सरकार ने उठाए कई कदम


चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने और बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने चीनी कारोबारियों के स्टॉक पर सीमा तय की है। 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक कारोबारियों को अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी रखने और किसी खेप को 15 दिनों से ज्यादा समय तक जमा नहीं रखने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था कोलकाता और उसके आसपास के महानगरीय क्षेत्र तथा असम को छोड़कर लागू की गई है। 


इसके अलावा सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है। चीनी मिलों और कारोबारियों के स्टॉक की जांच भी की जा रही है। नए सीजन में गन्ने की पेराई जल्दी शुरू कराने के प्रयास किए गए हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के अनुसार, 30 अक्टूबर तक 152 मिलों ने नए सीजन में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था। इसके बावजूद नवंबर की शुरुआत में खुदरा कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। 


दिवाली से पहले आम लोगों पर बढ़ा खर्च का दबाव


चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर त्योहारों की खरीदारी पर पड़ सकता है। दिवाली के दौरान घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने के लिए चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में कीमतें ऊंची रहने से आम परिवारों का बजट प्रभावित हो सकता है। अब देखना होगा कि नए सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़ने के बाद बाजार में कीमतों पर कितना असर पड़ता है।