Patna NEET Student Death: शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बंद कमरों वाली मौत,ऑक्सीजन कारोबारी और जहानाबाद का दबंग आरोपी मनीष रंजन की जमानत खारिज, सवाल जिंदा-तीन दिन तक क्या सोती रही पटना पुलिस? पढ़िए इनसाइड स्टोरी
बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की रहस्यमयी मौत अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर सवालों का पुलिंदा बन चुकी है।
Patna NEET Student Death: बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की रहस्यमयी मौत अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर सवालों का पुलिंदा बन चुकी है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई इस मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद एक बार फिर पूरा मामला सुर्खियों में है। लेकिन जमानत खारिज होने के साथ ही कई ऐसे तीखे सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब न पुलिस दे पा रही है और न ही सिस्टम।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 6 से 9 जनवरी तक आखिर पुलिस कर क्या रही थी? छात्रा की हालत गंभीर थी, मामला संवेदनशील था, फिर भी तीन दिन तक छात्रा के कमरे को सील क्यों नहीं किया गया? क्या यह मान लिया जाए कि इन तीन दिनों में सबूतों से छेड़छाड़ नहीं हुई होगी? अगर हुई, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? परिजन पहले दिन से चीख-चीखकर कह रहे थे कि जांच नहीं हो रही, फिर पुलिस ने आंख-कान क्यों बंद कर रखे थे?
पुलिस का तर्क है कि परिजनों ने तत्काल केस दर्ज नहीं कराया, लेकिन सवाल यह है कि क्या अपराध होने के बाद पुलिस स्वतः संज्ञान नहीं ले सकती? क्या गंभीर हालत में मिली छात्रा की मौत सिर्फ एक औपचारिक सूचना बनकर रह गई थी? परिजनों का सीधा आरोप है कि सबूतों को सुरक्षित नहीं रखा गया, तीन दिन तक पुलिस कुंभकर्णी नींद में सोती रही और जब मामला मीडिया और सियासत में उछला, तब जाकर हरकत में आई। चित्रगुप्त नगर थाने की थाना प्रभारी रौशनी पर तो पहले दिन से हीं आरोप लगते रहे हैं, लेकिन जांच में वे हर जगह साथ दिख रही हैं।
हैरानी की बात यह भी है कि जांच से पहले ही एएसपी स्तर से नींद की गोली की थ्योरी हवा में उछाल दी गई। क्या पुलिस को पहले ही सपना आ गया था कि छात्रा ने नींद की गोली खाई है? अगर आत्महत्या की कोशिश थी, तो फिर छात्रा के कमरे को तुरंत सील क्यों नहीं किया गया? लोग खुलेआम सवाल कर रहे हैं कि क्या पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश हुई।
तीसरा बड़ा सवाल शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका नीलम अग्रवाल को लेकर है। वह कहां है? क्या पुलिस ने उनसे गंभीर पूछताछ की? हॉस्टल में हुई मौत के बाद भी संचालिका पर कानून का शिकंजा क्यों नहीं कसा गया?
और सबसे अहम सवाल मनीष रंजन का इस पूरे कांड से क्या लेना-देना है? अगर पुलिस मान रही है कि छात्रा ने आत्महत्या की कोशिश की, तो फिर मनीष को किस जुर्म में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया? हाईकोर्ट ने उसकी जमानत किन आधारों पर खारिज की यह भी अभी तक साफ नहीं है।बता दें जहानाबाद का मनीष चंद्रवंशी 2020 में पटना आया और महज फोर्थ ग्रेड कर्मचारी से करोड़ों की संपत्ति वाला दबंग बन गया। कोरोना काल में ऑक्सीजन सप्लाई की एजेंसी ने उसकी किस्मत बदल दी। आज पटना में उसके नाम पर आलीशान इमारतें और कीमती जमीनें हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छात्रा की मौत के मामले में मनीष के पुराने रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में हैं। पहले भी हर्ष फायरिंग और हिंसा के मामले में नाम दर्ज हो चुका है। छात्रा की मौत और सबूत मिटाने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया है। ।
वहीं, इस मामले में बिहार के एक बड़े नेता का नाम भी अंदरखाने लिया जा रहा है। वह कौन हैं और इस केस से उनका क्या रिश्ता है, यह सवाल भी हवा में तैर रहा है।
अब पुलिस का पक्ष भी जान लीजिए। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में गठित एसआईटी अब तक 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है। छात्रा के परिजन समेत 40 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। पटना और जहानाबाद से कई अहम सबूत जुटाए गए हैं। रेंज आईजी पटना जितेंद्र राणा के नेतृत्व में करीब 40 अफसरों की टीम रात-दिन जांच में जुटी है। 65 से ज्यादा जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा चुके हैं, मोबाइल का सीडीआर और डिलीट व्हाट्सएप चैट भी रिकवर कर ली गई है।
पुलिस का दावा है कि पटना एम्स की सेकेंड ओपिनियन और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। लेकिन फिलहाल सच्चाई यह है कि जवाबों से ज्यादा सवाल हैं और बिहार की नजर इस पूरे मामले पर टिकी हुई है।