नीतीश को साथ लाकर भाजपा ने एक तीर से किया कई शिकार, लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका

पटना. नीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते ही भाजपा ने एक तीर से कई शिकार कर लिए है. भले ही नीतीश का इस्तीफा बिहार में हुआ हो लेकिन भाजपा ने इससे राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका दिया है. नीतीश के इस्तीफे से कांग्रेस को झटका राष्ट्रीय स्तर पर देने में भाजपा को यह पहली बड़ी सफलता है. लोकसभा चुनाव के पहले एनडीए के कुनबे को मजबूत करने और कांग्रेस सहित अन्य विरोधी दलों को जोरदार झटका देने में नीतीश पर चला यह तीर सबसे सटीक निशाना है. नीतीश कुमार ने 18 महीने 18 दिन पहले अगस्त 2022 में बिहार महागठबंधन सरकार बनाई थी. 

महागठबंधन सरकार बनते ही नीतीश कुमार ने ऐलान किया था कि जो 2014 में आए हैं वे 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर से केंद्र की सत्ता में नहीं आएंगे. नरेंद्र मोदी को लेकर उनका यह ऐलान सफल हो इसके लिए नीतीश ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के नेताओं संग मुलाक़ात की. अंततः जून 2023 में पटना में विपक्षी दलों की बैठक हुई. बाद में बेंगलुरु और मुंबई में भी करीब 28 विपक्षी दल एक छत के नीचे आए. विपक्ष के इस गठबंधन का नाम ‘इंडिया’ रखा गया. इसके साथ ही नीतीश कुमार की पहल राष्ट्रीय स्तर पर साकार हुई. लेकिन यहीं से नीतीश की पहल कुंद भी पड़ गई क्योंकि कई मुद्दों पर लम्बे इंतजार के बाद भी इंडिया में सहमति नहीं बनी. सीट शेयरिंग हो या संयोजक बनाने का मुद्दा. कुछ भीफाइनल नहीं हुआ. 

यहां तक कि पिछले दिनों नीतीश कुमार को जब संयोजक बनाने की बात हुई और उन्होंने इससे इनकार कर दिया तो यह एक बड़ा झटका रहा. वहीं अलग अलग सर्वे में जो बातें सामने आई थी वह भाजपा की चिंता बढ़ा रही थी. बिहार में 40 लोकसभा सीटों को लेकर जो सर्वे आए थे उसमें एनडीए को झटका लगने की बात थी. वहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी अगर इंडिया से भाजपा को बड़ा झटका लग सकता है. लेकिन पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी से अलग होकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया. उसके बाद अब नीतीश भी एनडीए के साथ हो गए. 

नीतीश को अपने पाले में लाकर भाजपा ने इंडिया की बुनियाद रखने वाले ही उखाड़ दिया. जिसने बीजारोपण किया उसी नीतीश कुमार को अपने पाले में लाकर विपक्षी एकता की हवा निकाल दी. साथ ही जिस प्रयास को लगातार नीतीश कुमार कर रहे थे उनके अलग होने से अब कई अन्य दल भी इंडिया से अलग होंगे यह करीब करीब तय है. इस पूरे खेल में भाजपा का पलड़ा भारी हो गया है. भाजपा को विपक्षी एकता से बड़ी चुनौती मिल सकती थी. लेकिन नीतीश के अलग होते ही अब फिर से इंडिया एकजुट होगा यह मुश्किल दिख रहा है. साथ ही कांग्रेस का पहले से कई दलों से मतभेद है जो अब और ज्यादा खुलकर सामने आने की उम्मीद है. इस पूरे खेल में भाजपा ने जहाँ एनडीए को मजबूत कर लिया वहीं इंडिया की कमर ही तोड़ दी है.