पेट्रोल डीजल पर मंडराया खतरा, अमेरिकी हमले में ईरानी सैनिक घायल, अरब सागर में वॉरशिप पर निशाना

Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग थमने के बजाय नए समुद्री मोर्चों तक फैलती नजर आ रही है।

ईरान जंग में नया मोर्चा- फोटो : social Media

Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग थमने के बजाय नए समुद्री मोर्चों तक फैलती नजर आ रही है। ईरानी नौसेना ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार तड़के दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित कोनार्क नौसैनिक अड्डे पर हमला किया, जिसमें दो ईरानी सैनिक घायल हो गए। दूसरी ओर, ईरान की तरफ से उत्तरी अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के एक अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर को निशाना बनाने की कोशिश किए जाने की खबर है। हालांकि, इन घटनाओं के कई अहम पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि और अमेरिकी पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, तेल आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच, ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर संभावित हमले की चर्चाओं ने तनाव को और गंभीर बना दिया है।

कोनार्क नेवी बेस पर हमले का ईरान ने किया दावा

ईरानी नौसेना के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने कोनार्क नौसैनिक अड्डे पर दो हल्के प्रोजेक्टाइल दागे। दावा है कि इनका निशाना वहां तैनात 35 मिलीमीटर की एक तोप थी। हमले में दो ईरानी सैनिक घायल हुए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस हथियार को ही निशाना क्यों बनाया गया और क्या उसका किसी हालिया सैन्य टकराव में इस्तेमाल हुआ था।कोनार्क नौसैनिक अड्डा ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।फिलहाल, हमले के बारे में ईरानी पक्ष के दावों के अलावा अमेरिकी सेना की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की पुष्टि नहीं है।

उत्तरी अरब सागर में अमेरिकी डिस्ट्रॉयर को निशाना बनाने की खबर

इस बीच, रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने उत्तरी अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर को निशाना बनाने की कोशिश की। कुछ विवरणों में एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों के इस्तेमाल की बात कही गई है, जबकि शुरुआती दावों में बैलिस्टिक मिसाइल का जिक्र भी सामने आया है। इसलिए हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार और उसके वास्तविक नतीजों को लेकर अभी सावधानी बरतना जरूरी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना के एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों ने यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश विमानवाहक पोत से उड़ान भरकर दक्षिण-पूर्वी ईरान के कोनार्क क्षेत्र में आईआरजीसी नौसेना से जुड़े ठिकानों पर हमले किए। ईरान के इस्फहान और कुम प्रांतों से बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इन सभी घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि और उनका सटीक क्रम स्पष्ट होना बाकी है।

खर्ग द्वीप पर हमले की आशंका क्यों बढ़ा सकती है संकट?

ईरान के खर्ग द्वीप को लेकर भी संभावित सैन्य कार्रवाई की चर्चाएं तेज हैं। यह द्वीप ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का प्रमुख केंद्र है। उपलब्ध विवरणों में ईरान के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी द्वीप से होने की बात कही जाती है, हालांकि 90 प्रतिशत के आंकड़े की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।यदि खर्ग द्वीप के तेल निर्यात ढांचे को निशाना बनाया जाता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। साथ ही, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों, बीमा लागत और समुद्री परिवहन पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, संभावित हमले की चर्चा को वास्तविक सैन्य कार्रवाई या अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

होर्मुज से अरब सागर तक बढ़ता तनाव

कोनार्क नौसैनिक अड्डे, उत्तरी अरब सागर में अमेरिकी युद्धपोत और खर्ग द्वीप से जुड़ी खबरें इस संघर्ष के व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव की ओर इशारा करती हैं। इस इलाके में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ सकती है।फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष इन घटनाओं के बाद जवाबी कार्रवाई तेज करेंगे या तनाव सीमित रखने की कोशिश करेंगे। आधिकारिक बयान और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सामने आने के बाद ही हमलों के वास्तविक नुकसान और आगे की रणनीति को लेकर स्पष्ट तस्वीर बन सकेगी।