तमिलनाडु में विजय कैबिनेट का बड़ा विस्तार, कांग्रेस समेत 23 मंत्रियों को दिलाई शपथ, ब्राह्मण पर बड़ा दांव

मुख्यमंत्री विजय ने अपने मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश करते हुए सात दलित नेताओं को जगह दी है। वहीं, कई दशकों बाद दो ब्राह्मण समुदाय के नेताओं को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है।

Tamil Nadu cabinet  expansion
Tamil Nadu cabinet expansion- फोटो : news4nation

Tamil Nadu Cabinet :  सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार में गुरुवार को बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया। मुख्यमंत्री विजय ने 23 नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया, जिसके बाद कैबिनेट में कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। इसमें कांग्रेस के दो विधायकों को भी मंत्री बनाया गया है। राजभवन स्थित लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आरवी आर्लेकर ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कांग्रेस विधायक एस राजेश कुमार और पी विश्वनाथन ने भी मंत्री पद की शपथ ली। बताया जा रहा है कि 1967 के बाद यह पहला मौका है जब कांग्रेस तमिलनाडु सरकार में शामिल हुई है।


मुख्यमंत्री विजय ने अपने मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश करते हुए सात दलित नेताओं को जगह दी है। वहीं, कई दशकों बाद दो ब्राह्मण समुदाय के नेताओं को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है। नए मंत्रियों में 27 वर्षीय एस कमाली भी शामिल हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री L. Murugan को हराकर राजनीतिक सुर्खियां बटोरी थीं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता पी विश्वनाथन को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है। यदि ऐसा होता है तो स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा दोनों विभाग दलित नेताओं के पास होंगे। वर्तमान स्कूल शिक्षा मंत्री ए राजमोहन भी दलित समुदाय से आते हैं।


मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दलों का भी ध्यान रखा गया है। विजय ने VCK और IUML के लिए एक-एक मंत्री पद सुरक्षित रखा है, जिन्हें जल्द सरकार में शामिल किया जाएगा। इसके बाद मंत्रिमंडल की संख्या अधिकतम सीमा 35 तक पहुंच जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए विजय ने AIADMK के संभावित बागी विधायकों के लिए सरकार में शामिल होने के रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं। साथ ही यह कदम उनकी “एंटी-BJP” और “एंटी-करप्शन” छवि को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।


सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता था कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे AIADMK नेताओं को सरकार में शामिल कर TVK की चुनावी छवि को नुकसान पहुंचे। पार्टी के भीतर यह भी आशंका थी कि BJP से करीबी माने जाने वाले कुछ नेताओं की एंट्री से मतदाताओं के बीच गलत संदेश जाएगा।