Sharda Sinha ki Yaadein: शारदा सिन्हा का पहला ऑडिशन, जहिर अहमद ने किया रिजेक्ट,पति ने की प्रार्थना फिर उसी कंपनी के इस शख्स ने किया सेलेक्ट...कमाल हो गया

शारदा सिन्हा का संगीत सफर केवल उनकी प्रतिभा का परिणाम नहीं था, बल्कि उनके पति के समर्थन और उनकी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा था। HMV की प्रतियोगिता से मिले इस अवसर ने उन्हें भारतीय लोक संगीत का एक अमूल्य रत्न बना दिया।

Sharda Sinha ki Yaadein: शारदा सिन्हा का पहला ऑडिशन, जहिर अह
शारदा सिन्हा का संगीत सफर- फोटो : social media

Sharda Sinha ki Yaadein:बिहार की लोक गायिका और स्वर कोकिला कही जाने वाली शारदा सिन्हा का आज 5 नवंबर को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। उनके मौत से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके चाहने वालों को यकीन ही नहीं हो रहा है कि वो अब हमारे बीच नहीं रही। वो भी छठ जैसे महापर्व के दौरान, जिसके गीतों के लिए वो पूरे देश-दुनिया में फेमस थी।


शारदा सिन्हा का संगीत का सफर आसान नहीं था। उन्होंने काफी संघर्ष देखा तब जाकर अपनी एक अलग पहचना बनाई है। तो आज हम आपको उनके लाइफ के पहले ऑडिशन के बारे में बताएंगे। बता दें कि उनके संगीतमय जीवन में 1971 एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। लखनऊ में एचएमवी (His Master's Voice) द्वारा आयोजित प्रतिभा खोज प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर उन्हें और उनके पति को लखनऊ लेकर गया। ऑडिशन के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका दृढ़ संकल्प और उनके पति का समर्थन उनके साथ था।

NIHER


HMV में चयन की कहानी

ऑडिशन में शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा, लेकिन HMV के रिकॉर्डिंग मैनेजर जहीर अहमद ने किसी को भी तुरंत सिलेक्ट नहीं किया। उनके पति ने जहीर अहमद से निवेदन किया कि वे शारदा का एक और बार टेस्ट लें। इस बार शारदा सिन्हा ने "यौ दुलरुआ भैया..." गाया, और उसी समय एचएमवी के एक वरिष्ठ अधिकारी वीके दुबे वहां पहुंचे। शारदा की आवाज सुनते ही वीके दुबे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत उनके गाने को रिकॉर्ड करने का आदेश दे दिया। इस रिकॉर्डिंग के बाद शारदा सिन्हा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, और उनके संगीत करियर की शुरुआत हो गई।

Nsmch


छठ गीतों की शुरुआत

शारदा सिन्हा ने अपने परिवार से छठ के गीतों की प्रेरणा ली। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके नानी छठ पूजा के लिए विशेष रूप से पटना आकर गंगा नदी में अर्घ्य देती थीं। उनके घर में छठ के पारंपरिक गीत गाए जाते थे, जो उनके कानों में पड़ते और धीरे-धीरे उन्हें याद हो जाते थे। इन गीतों की पवित्रता और मधुरता ने शारदा सिन्हा के दिल में एक गहरी छाप छोड़ी, और बाद में उन्होंने इन गीतों को रिकॉर्ड किया।


छठ गीतों में पहचान

छठ के गीतों ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। शारदा सिन्हा के गाए छठ गीतों की पवित्रता और भावुकता ने लाखों लोगों के दिलों को छुआ। गंगा नदी में अर्घ्य देने की परंपरा और छठी मैया की पूजा से जुड़े इन गीतों ने उन्हें बिहार और पूर्वी भारत का लोकगायन का पर्याय बना दिया।