पीएम केयर्स फंड से बना ऑक्सीजन प्लांट हुआ 'कबाड़', करोड़ों की बर्बादी पर उठे सवाल
Bihar News : मरीजों को जीवन देने वाला यह पीएसए प्लांट कबाड़ के ढेर में तब्दील हो गया है।कोरोना काल में पीएम केयर्स फंड के जरिए करोड़ों की लागत से नवादा सदर अस्पताल में इस जीवन रक्षक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था...
Nawada : कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान जब ऑक्सीजन की कमी से देश तड़प रहा था, तब पीएम केयर्स फंड के जरिए करोड़ों की लागत से नवादा सदर अस्पताल में जीवन रक्षक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। वर्ष 2021 में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से इसका उद्घाटन किया था। लेकिन आज विडंबना यह है कि मरीजों को जीवन देने वाला यह पीएसए प्लांट खुद दम तोड़ चुका है और कबाड़ के ढेर में तब्दील हो गया है।
कचरे और जंग के बीच सिसकती व्यवस्था
वर्तमान में इस ऑक्सीजन प्लांट की स्थिति बेहद दयनीय और चिंताजनक है। प्लांट परिसर के चारों ओर गंदगी और कचरा बिखरा पड़ा है। करोड़ों रुपये के कीमती उपकरण रखरखाव के अभाव में जंग खा रहे हैं। पूरी संरचना अब केवल एक शो-पीस बनकर रह गई है। जिस प्लांट को जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना गया था, वह अब प्रशासनिक उपेक्षा और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।
चोरों का चारागाह बना अस्पताल परिसर
संसाधनों की बर्बादी यहीं नहीं थमी; सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक के कारण इस बंद पड़े प्लांट से लाखों रुपये के कनेक्शन पाइप, महत्वपूर्ण उपकरण और अन्य पार्ट्स चोरी हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने इस संबंध में पुलिस में औपचारिक शिकायत तो दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। नतीजा यह है कि अस्पताल को अब निजी एजेंसियों से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदकर मरीजों की जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं।
रखरखाव की कमी और प्रशासनिक अनदेखी
प्लांट के बंद होने के पीछे तकनीकी से ज्यादा प्रबंधकीय विफलता सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेटरों की कमी, नियमित सर्विसिंग का न होना और सुरक्षा की लचर स्थिति ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को नष्ट कर दिया। इस पर सदर अस्पताल के प्रबंधक कुमार आदित्य ने केवल तकनीकी खराबी का हवाला देते हुए जल्द मरम्मत का आश्वासन दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
जनता में भारी आक्रोश, जवाबदेही पर सवाल
प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित इस प्रोजेक्ट की ऐसी दुर्दशा को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा गुस्सा है। नवादा की यह स्थिति बिहार के कई अन्य जिलों की कहानी है, जहां कोविड के बाद बने ऑक्सीजन प्लांट अब सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। जनता अब सवाल पूछ रही है कि उनके टैक्स के करोड़ों रुपये की इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार कौन है? स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस प्लांट को अविलंब चालू करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
अमन सिन्हा की रिपोर्ट