Bihar Jail Law 2026:बिहार की जेलों में बड़ा बदलाव, अपराध की श्रेणी के हिसाब से होंगे कैदी अलग, पैरोल पर इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग होगी अनिवार्य

Bihar Jail Law 2026: बिहार सरकार जेल व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है।...

Bihar Jails to Segregate Inmates E Tracking for Parolees
बिहार की जेलों में बड़ा बदलाव- फोटो : social Media

Bihar Jail Law 2026: बिहार सरकार जेल व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रस्तावित बिहार कारा एवं सुधारात्मक विधेयक-2026 के तहत राज्य की आठ केंद्रीय काराओं सहित सभी 59 जेलों में बंदियों को अब अपराध की प्रकृति, उम्र, लिंग और जोखिम के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। नए कानून का मकसद जेलों को केवल बंदीगृह नहीं, बल्कि सुधारात्मक केंद्र बनाना है, ताकि छोटे अपराधों में जेल पहुंचे लोग आदतन अपराधियों के प्रभाव में आकर अपराध की दुनिया में और गहराई तक न उतरें।

नए प्रावधानों के अनुसार कैदियों को दीवानी, आपराधिक, दोषी करार, विचाराधीन, निरुद्ध, आदतन और पुनरावृत्ति अपराधी जैसी सात प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। इन सभी श्रेणियों के बंदियों को अलग-अलग बैरकों, कक्षों और परिसरों में रखा जाएगा। खासतौर पर उच्च जोखिम वाले और आदतन अपराधियों के लिए विशेष सुरक्षा कक्ष बनाए जाएंगे, जहां उनकी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे जेलों के भीतर अपराधी नेटवर्क और कट्टरपंथी सोच के फैलाव पर प्रभावी रोक लगेगी।

विधेयक में लिंग के आधार पर भी बंदियों को महिला, पुरुष और ट्रांसजेंडर श्रेणियों में अलग रखने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 10 विशेष उपश्रेणियां भी बनाई जाएंगी, जिनमें पहली बार अपराध करने वाले, मादक पदार्थों के आदी, विदेशी नागरिक, वृद्ध एवं अशक्त, संक्रामक या दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित, मानसिक रोगी, मृत्युदंड प्राप्त, उच्च जोखिम वाले बंदी, बच्चों के साथ रहने वाली महिला कैदी और तरुण बंदी शामिल होंगे।

कैदियों के वर्गीकरण और सुरक्षा आकलन के लिए एक विशेष समिति गठित की जाएगी। इसमें कारा एवं सुधारात्मक सेवा के अधिकारियों के साथ अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी भी शामिल होंगे। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रत्येक बंदी की श्रेणी और सुरक्षा स्तर तय किया जाएगा।

नए कानून का सबसे अहम प्रावधान पैरोल व्यवस्था को लेकर किया गया है। अब पैरोल पर बाहर जाने वाले बंदियों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग उपकरण पहनना अनिवार्य होगा। बंदी को पहले इसकी सहमति देनी होगी, तभी उसे पैरोल की अनुमति मिलेगी। यदि कोई बंदी ट्रैकिंग डिवाइस को हटाने, बंद करने या उससे छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो उसकी पैरोल तत्काल रद्द कर दी जाएगी और भविष्य में उसे इस सुविधा का लाभ भी नहीं मिलेगा।

इसके साथ ही आदतन और उच्च जोखिम वाले दोषी बंदियों, जमानत पर छूटने वाले विचाराधीन कैदियों और पैरोल पर रिहा होने वाले बंदियों की जानकारी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अनिवार्य रूप से दी जाएगी, ताकि उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से जेलों की सुरक्षा, बंदियों के सुधार और समाज की सुरक्षा—तीनों उद्देश्यों को एक साथ मजबूती मिलेगी।