FIR टालने वाले अंचलाधिकारियों पर भी गिरेगी गाज! जमीन की हेराफेरी करने वालों के लिए काल बना नया कानून
बिहार में जमीन के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए बुरी खबर! अब जाली कागजात दिखाने पर सीधे जेल होगी। राजस्व विभाग ने अंचलाधिकारियों को FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।
Patna - बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री और सरकारी कार्यों में फर्जी कागजात लगाकर प्रशासन को चूना लगाने वालों की अब खैर नहीं है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने राज्य के सभी अंचलाधिकारियों (CO) को बेहद आक्रामक निर्देश जारी किया है । विभाग ने साफ कर दिया है कि नामांतरण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन और भू-अर्जन जैसे कार्यों में अगर कोई भी व्यक्ति जाली या कूटरचित दस्तावेज पेश करता है, तो उसके खिलाफ अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी ।
अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही पर भी नकेल
सरकार ने यह कड़ा रुख 'भूमि सुधार जन कल्याण संवाद' के दौरान सामने आई धांधलियों के बाद अपनाया है । समीक्षा में यह बात सामने आई कि कई मामलों में फर्जीवाड़े की जानकारी होने के बावजूद अंचलाधिकारियों ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी । सचिव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जाली दस्तावेज के मामलों को दबाना या प्राथमिकी दर्ज न करना 'घोर लापरवाही और कदाचार' माना जाएगा । इसके लिए संबंधित अंचलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे और उन पर भी गाज गिर सकती है ।
BNS की इन धाराओं में नपेंगे जालसाज
अब धोखाधड़ी करने वालों पर 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' (BNS) की सख्त धाराओं के तहत केस चलेगा । सरकार ने एफआईआर के लिए विशेष धाराओं का उल्लेख किया है:
- कूटरचना (Forgery): धारा-336 (3) एवं 336 (4) के तहत कार्रवाई होगी ।
- धोखाधड़ी (Cheating): छल करने वालों पर धारा-318 (4) लगाई जाएगी ।
- फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल: जाली कागज को असली बताकर पेश करने पर धारा-340(2) के तहत केस दर्ज होगा ।
- आपराधिक साजिश: परिस्थितियों के अनुसार धारा-61 (2) (a) के तहत आपराधिक षडयंत्र का मामला भी बनेगा ।
पुराने फैसलों की भी होगी दोबारा जांच
सरकार ने आदेश दिया है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर भविष्य में कोई आदेश पारित न किया जाए । इतना ही नहीं, विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि पूर्व में फर्जी कागजातों के आधार पर कोई आदेश जारी हो चुका है, तो उसकी विधि सम्मत समीक्षा कर नियमनुसार सख्त कार्रवाई की जाए । सरकारी जमीन के मामले में अंचलाधिकारी सीधे एफआईआर कराएंगे, जबकि निजी जमीन विवाद में जांच के बाद पीड़ित पक्ष की अनुशंसा पर केस दर्ज होगा ।
Report - bandana sharma