बिहार ने किया बड़ा कमाल, स्कूली शिक्षा में कर्नाटक-तमिलनाडु- गुजरात सहित इन राज्यों को छोड़ा पीछे, केंद्र ने लगाई मुहर

शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे तो बिहार को लेकर कई किस्म की चिंताएं जाहिर की जाती रही हैं लेकिन अब केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट ने राज्य के लिए बड़ी खुशखबरी है जिसमें तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों से बिहार आगे निकल गया है

Center Report on Bihar Schools
Center Report on Bihar Schools- फोटो : news4nation

Bihar Education News : स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन में बिहार ने कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 रिपोर्ट में सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) के मामले में बिहार का प्रदर्शन इन राज्यों से बेहतर दर्ज किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य को बुनियादी ढांचे और स्कूल सुविधाओं के क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए जारी पीजीआई 2.0 रिपोर्ट में बिहार को 'आकांक्षी-1 (Akanshi-1)' ग्रेड मिला है। राज्य ने 1,000 में 564.8 अंक हासिल किए हैं, जबकि पिछले वर्ष 2024-25 में बिहार को 507 अंक मिले थे। यानी राज्य के कुल प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।


इन क्षेत्रों में शानदार उपलब्धि

पीजीआई 2.0 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन 70 संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इसके लिए यूडीआईएसई प्लस (UDISE+), परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024, पीएम पोषण योजना समेत विभिन्न सरकारी पोर्टलों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इन 70 संकेतकों को छह प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की सबसे बड़ी उपलब्धि 'समानता (Equity)' के क्षेत्र में रही है। इस श्रेणी में राज्य ने 260 में 221.5 अंक हासिल कर 'उत्तम-1' ग्रेड प्राप्त किया। इसका मतलब है कि लड़कों और लड़कियों, ग्रामीण और शहरी छात्रों तथा सामान्य और अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक अंतर कम हुआ है।


वहीं 'शिक्षा तक पहुंच (Access to Education)' में बिहार को 80 में 54.7 अंक और 'शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (Teacher Education & Training)' में 100 में 67 अंक मिले। दोनों श्रेणियों में राज्य को 'उत्तम-3' ग्रेड मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे छात्रों के नामांकन, स्कूल में बने रहने की दर और शिक्षकों के प्रशिक्षण में सुधार का संकेत मिलता है।


लर्निंग आउटकम के क्षेत्र में बिहार को 240 में 81.9 अंक मिले हैं और इस श्रेणी में 'प्रचेष्टा-3' ग्रेड दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा 3, 6 और 9 के विद्यार्थियों की भाषा और गणित की बुनियादी दक्षता में अभी सुधार की जरूरत है। बावजूद इसके, इस श्रेणी में बिहार का प्रदर्शन कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और उत्तराखंड से बेहतर रहा।


सबसे बड़ी कमजोरी इन्फ्रास्ट्रक्चर

हालांकि, रिपोर्ट में बिहार की सबसे बड़ी कमजोरी 'इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं सुविधाएं' बताई गई हैं। इस श्रेणी में राज्य को 190 में केवल 64.8 अंक मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कई स्कूलों में आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी अब भी बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बिजली, इंटरनेट, कंप्यूटर, पुस्तकालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।


शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सीखने के परिणाम और समानता के क्षेत्र में राज्य का बेहतर प्रदर्शन उत्साहजनक है। उन्होंने माना कि बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्था में अभी सुधार की जरूरत है। इसके लिए बिहार सरकार अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए टीम भेजेगी, ताकि आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया जा सके। 


चंडीगढ़ को सर्वोच्च स्थान

राष्ट्रीय स्तर पर चंडीगढ़ को 'उत्तम-3' श्रेणी में सर्वोच्च स्थान मिला है। वहीं देश का कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अभी तक शीर्ष तीन श्रेणियों—उत्कर्ष, उत्तम-1 और उत्तम-2—तक नहीं पहुंच सका है। इससे स्पष्ट है कि देशभर में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में अभी भी व्यापक सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।