Bihar Sports: कभी मैदान के मोहताज बिहार ने बदली तस्वीर, अब दुनिया के खेल आयोजनों का नया ठिकाना
Bihar Sports:कभी खेल अवसंरचना की कमी के चलते बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी से महरूम रहने वाला बिहार अब खेल के नक्शे पर तेजी से अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। ...
Bihar Sports:कभी खेल अवसंरचना की कमी के चलते बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी से महरूम रहने वाला बिहार अब खेल के नक्शे पर तेजी से अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में खेल अवसंरचना पर किए गए बड़े निवेश ने राज्य की तस्वीर बदलने के साथ ही ‘ब्रांड बिहार’ को नई ताकत दी है। राजगीर से लेकर पटना और जिला-पंचायत स्तर तक विकसित हो रहे खेल परिसरों ने खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के साथ बिहार को बड़े आयोजनों के लिए मुकम्मल मंच के तौर पर स्थापित किया है।
इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है। करीब 90 एकड़ में विकसित इस विश्वस्तरीय परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला हॉकी स्टेडियम, बहुउद्देशीय इंडोर हॉल, ओलंपिक आकार का स्विमिंग पूल, एथलेटिक्स सुविधाएं और खिलाड़ियों के लिए खेल चिकित्सा केंद्र जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके साथ बिहार खेल विश्वविद्यालय की स्थापना ने खेल शिक्षा और प्रशिक्षण को भी नई दिशा दी है। हाल में 40 हजार दर्शकों की क्षमता वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से बिहार में बड़े क्रिकेट आयोजनों की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
राजधानी पटना में भी खेल ढांचे को लगातार आधुनिक बनाया जा रहा है। पाटलिपुत्र खेल परिसर में फुटबॉल, एथलेटिक्स और विभिन्न इंडोर खेलों के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं। ऊर्जा स्टेडियम, मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास की पहल, प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना खिलाड़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रही है। पुनपुन क्षेत्र में अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने की कवायद भी इसी कड़ी का हिस्सा है।
खास बात यह है कि खेल सुविधाओं का दायरा अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। प्रखंड, जिला और पंचायत स्तर तक खेल मैदान, इंडोर हॉल, खेल भवन-सह-व्यायामशाला और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और बैडमिंटन जैसे खेलों के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिलने से ग्रामीण प्रतिभाओं को अपने घर के करीब अभ्यास का अवसर मिल रहा है।
इन प्रयासों का असर बड़े आयोजनों की मेजबानी में भी दिखाई दे रहा है। 2024 में राजगीर में महिला एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के सफल आयोजन के बाद 2025 में सेपक टकरा वर्ल्ड कप, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, एशिया अंडर-20 रग्बी सेवन्स चैंपियनशिप, पुरुष हॉकी एशिया कप, नेशनल स्कूल गेम्स समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं बिहार में आयोजित हुईं।
यानी बिहार अब सिर्फ खिलाड़ियों की तलाश नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें तराशने से लेकर दुनिया के सामने मंच देने तक की मुकम्मल तैयारी कर रहा है। खेल विभाग का लक्ष्य भी महज स्टेडियम खड़ा करना नहीं, बल्कि ऐसी खेल संस्कृति विकसित करना है जहां गांव-कस्बों की प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं, पहचान और आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें। खेल के जरिए प्रतिभा को सम्मान और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने की यह कवायद बिहार की बदलती तस्वीर की मजबूत निशानी बन रही है।