बेगूसराय में 125 करोड़ के प्रोजेक्ट में 'टेंडर सेटिंग' का खेल, एक ठेकेदार को लाभ देने के लिए BUDCO ने तीन बार बदले गए नियम!
बेगूसराय में जलापूर्ति योजना को लेकर बुडको की ओर से जारी निविदा में तीन बार नियमों के बदले जाने और इसे आसान बनाए जाने के कारण कई किस्म के सवाल उठे हैं. खासकर सांठगांठ के सहारे किसी खास ठेकेदार को फायदा पहुँचाने के आरोप लगाये जा रहे हैं.
Bihar News : बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BUDCO) की महत्वाकांक्षी बेगूसराय जलापूर्ति योजना की निविदा प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। करीब 124.79 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए बुडको ने एक-दो नहीं, बल्कि तीन बार निविदा जारी की और हर बार पात्रता की शर्तों में बदलाव किए। आरोप है कि इन बदलावों का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा बढ़ाना नहीं, बल्कि एक खास ठेकेदार को पात्र बनाना था। सूत्रों के अनुसार, बार-बार पात्रता मानदंडों में किए गए बदलावों से न केवल निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि इससे परियोजना की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर भी गंभीर आशंकाएं पैदा होती हैं।
पहली निविदा में कड़े मानक
मार्च 2025 में अमृत 2.0 योजना के तहत बेगूसराय जलापूर्ति योजना के लिए पहली बार निविदा जारी की गई। उस समय पात्रता की शर्त थी कि इच्छुक ठेकेदार ने पिछले पांच वर्षों में दो वर्षों की अवधि के भीतर कम से कम 350 KLPH क्षमता वाले आयरन रिमूवल प्लांट का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया हो। बाद में इसी निविदा के दौरान इस क्षमता को घटाकर 270 KLPH कर दिया गया। उस समय केवल दो निविदार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से एक को कथित तौर पर दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद पूरी निविदा प्रक्रिया फिर से शुरू की गई।
दूसरी निविदा में और आसान हुई पात्रता
अगस्त 2025 में दूसरी बार निविदा जारी की गई। इस बार पात्रता की शर्तों में और अधिक ढील दी गई। आयरन रिमूवल प्लांट की न्यूनतम क्षमता 270 KLPH से घटाकर 175 KLPH कर दी गई। इसी तरह पहले जहां 2650 किलोलीटर क्षमता वाले ओवरहेड टैंक के निर्माण का अनुभव अनिवार्य था, उसे घटाकर 1025 किलोलीटर कर दिया गया। हालांकि बाद में बुडको ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए इस निविदा को भी रद्द कर दिया जबकि सूत्रों का कहना है की एक खास निविदार्थी को पात्रता मापदंड के अनुरूप सहूलियत देने के लिए ऐसा किया गया।
तीसरी बार फिर बदले नियम
अप्रैल 2026 में तीसरी बार इसी परियोजना के लिए निविदा जारी की गई। इस बार भी पात्रता की शर्तों में बदलाव किया गया। पहले शर्त थी कि ठेकेदार ने कम से कम 200 KL क्षमता वाला एक ग्राउंड लेवल सर्विस रिजर्वायर बनाया हो। बाद में इसे बदलकर कहा गया कि पिछले पांच वर्षों में किसी एक वर्ष के दौरान कई परियोजनाओं को मिलाकर 237 KL क्षमता का कार्य पूरा होना पर्याप्त होगा। इसी तरह ट्यूबवेल निर्माण की शर्त भी बदली गई। पहले एक 300 मिमी × 200 मिमी व्यास और 150 मीटर गहराई वाले ट्यूबवेल के निर्माण का अनुभव अनिवार्य था। बाद में इसे संशोधित कर कई परियोजनाओं में किए गए समान कार्यों के संयुक्त अनुभव को भी मान्य कर दिया गया। जैसे ट्यूबवेल निर्माण की जगह अगर इंटेक निर्माण किया हो तब भी उस निविदार्थी को पात्र माना जाएगा। वहीं 270 KLPH की शर्त में बदलाव करते हुए कहा गया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य अनुभव भी तो निविदा के लिए पात्र है।
सांठगांठ के आरोप
सूत्रों का आरोप है कि पात्रता मानदंडों में बार-बार बदलाव किसी तकनीकी आवश्यकता के कारण नहीं, बल्कि एक विशेष ठेकेदार को पात्र बनाने के उद्देश्य से किए गए। दावा किया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार प्रारंभिक शर्तों को पूरा नहीं करता था, इसलिए पात्रता मानदंडों को क्रमशः उसके अनुरूप संशोधित किया गया। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल निविदा प्रक्रिया में अनियमितता का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पात्रता मानदंड इस उद्देश्य से तय किए जाते हैं कि केवल अनुभवी और सक्षम एजेंसियां ही काम करें। यदि इन मानकों को बिना पर्याप्त तकनीकी आधार के बार-बार कम किया जाता है, तो परियोजना की गुणवत्ता, दीर्घकालिक स्थायित्व और सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जांच की मांग तेज
बेगूसराय जलापूर्ति योजना की निविदा प्रक्रिया में लगातार बदलावों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष थी या फिर किसी खास ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में संशोधन किया गया। पात्रता मानदंडों में किए गए बदलाव तकनीकी आवश्यकता थे या फिर किसी विशेष एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई इसे लेकर कई किस्म के सवाल उठने लगे हैं।