'काबिल मत बनो, दलित बनो, सफलता झक मारकर आएगी' ... IIT पटना के रजिस्ट्रार के खिलाफ आदित्य पासवान ने दर्ज कराया SC/ST केस
आदित्य पासवान ने कहा कि 'काबिल मत बनो, दलित बनो, सफलता झक मारकर आएगी' जैसी कथित टिप्पणी केवल दलित समाज का अपमान नहीं है, बल्कि सदियों से सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ चल रहे दलित समाज के संघर्ष का भी अपमान है।
Bihar News : IIT पटना के रजिस्ट्रार ए.के. ठाकुर द्वारा दलित समाज को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी 'काबिल मत बनो, दलित बनो, सफलता झक मारकर आएगी' के विरोध में कांग्रेस नेता आदित्य पासवान ने आज कानूनी कार्रवाई की पहल की है। आदित्य पासवान ने आज गर्दनीबाग स्थित अनुसूचित जाति/जनजाति थाना, पटना में ए.के. ठाकुर के विरुद्ध FIR दर्ज करने की मांग को लेकर लिखित शिकायत (कंप्लेन) दाखिल की, जिसे थाना प्रशासन ने प्राप्त कर लिया है। थाना प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए FIR दर्ज की जाएगी।
आदित्य पासवान ने कहा कि दलित समाज के सम्मान एवं अस्मिता से जुड़े इस गंभीर विषय को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि 'काबिल मत बनो, दलित बनो, सफलता झक मारकर आएगी' जैसी कथित टिप्पणी केवल दलित समाज का अपमान नहीं है, बल्कि सदियों से सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ चल रहे दलित समाज के संघर्ष का भी अपमान है। यह उन लाखों दलित परिवारों की मेहनत, त्याग और उम्मीदों का अपमान है, जो तमाम सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने बच्चों को शिक्षित कर सम्मानजनक भविष्य देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दलित समाज ने शिक्षा को अपनी मुक्ति, आत्मसम्मान और सामाजिक बराबरी का सबसे बड़ा हथियार बनाया है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी शिक्षा, संगठन और संघर्ष का संदेश दिया था। ऐसे में किसी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से यदि इस प्रकार की टिप्पणी की गई है, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।
आदित्य पासवान ने कहा कि दलित होना किसी की कमजोरी, अयोग्यता या सफलता का विकल्प नहीं है। दलित समाज के बच्चे भी अपनी प्रतिभा, मेहनत और योग्यता के दम पर देश के सर्वोच्च शैक्षणिक संस्थानों और महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचने का सपना देखते हैं। उन्हें प्रोत्साहित करने के बजाय ऐसी कथित टिप्पणी करना उनके आत्मसम्मान और शिक्षा के प्रति उनके विश्वास को चोट पहुंचाने वाला है।
उन्होंने आगे कहा कि IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से देश के युवाओं को समानता, वैज्ञानिक सोच और प्रगतिशील विचारों की प्रेरणा मिलनी चाहिए। ऐसे संस्थानों में जातिगत पूर्वाग्रह और किसी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। आदित्य पासवान ने केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और IIT पटना प्रशासन से मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोरतम अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। यह दलित समाज के सम्मान, शिक्षा के अधिकार, सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना की रक्षा की लड़ाई है।
आदित्य पासवान ने कहा कि दलित समाज अब अपने सम्मान और स्वाभिमान के सवाल पर चुप नहीं रहेगा। हमारी लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है जो दलितों की योग्यता, प्रतिभा और संघर्ष को कमतर आंकने का प्रयास करती है। संविधान ने हमें समानता और सम्मान का अधिकार दिया है और हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।