Bihar News : बिहार पर्यटन का बदल रहा अंदाज, धार्मिक पर्यटन से लेकर हेली-टूरिज्म और होमस्टे तक बड़े बदलाव की तैयारी

Bihar News : बिहार की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत अब आधुनिक तकनीक के साथ कदमताल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Bihar News : बिहार पर्यटन का बदल रहा अंदाज, धार्मिक पर्यटन स
पर्यटन का बदलेगा अंदाज - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार की हजारों साल पुरानी विरासत अब आधुनिक तकनीक के साथ कदमताल करती नजर आएगी। मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर प्राकृतिक स्थलों तक पर्यटन का अनुभव बदलने की तैयारी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक, हेली-टूरिज्म और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं के सहारे बिहार को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि डिजिटल युग में एआई और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के बिना पर्यटन क्षेत्र में आगे बढ़ना संभव नहीं है। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पर्यटन को विकास, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए बड़े स्तर पर काम कर रही है। वर्ष 2025 में बिहार में 6 करोड़ 62 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। पर्यटन विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,301 करोड़ रुपये तथा ‘प्रगति यात्रा 2025’ के तहत 2,710 करोड़ रुपये की 36 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

पुनौराधाम से विष्णुपद और हरिहरनाथ तक बदल रहा पर्यटन का परिदृश्य

बिहार के धार्मिक पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में कई बड़ी परियोजनाएं आकार ले रही हैं। सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मां सीता के भव्य एवं दिव्य मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं गया जी में 2,500 करोड़ रुपये की लागत से विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और सोनपुर में 680 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। बाबा गरीबनाथ मंदिर, अशोक धाम और अहिल्यास्थान जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर भी तेजी से काम हो रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में पर्यटक सुविधाओं, आवागमन, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना है।

ग्लास ब्रिज से हेली-टूरिज्म तक, पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव

बिहार में पर्यटन अनुभव को आधुनिक बनाने के लिए भी कई योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र, सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज और वाल्मीकि नगर में लव-कुश पार्क विकसित किया जा रहा है। पटना, राजगीर और वैशाली में फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर है। पर्यटकों के लिए हेली-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। पटना दर्शन, नालंदा और वाल्मीकि नगर जैसे स्थलों की हवाई यात्रा की सुविधा के साथ एयर एम्बुलेंस सेवा की योजना भी तैयार की गई है। पटना के अटल पथ से हरिहरनाथ मंदिर तक रोपवे की योजना भी पर्यटन के अनुभव को नया आयाम देने वाली है।

गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ

पर्यटन को स्थानीय लोगों की आय और रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री होमस्टे योजना के तहत 34 पर्यटन स्थलों के आसपास करीब 1,000 कमरे विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए लाभार्थियों को प्रति इकाई 11 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। पर्यटन नीति के तहत एक लाख लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण देने और अगले 5 वर्ष में 20 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए 25 से 30 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है।

पर्यटक की भाषा समझेगा पर्यटन का नया डिजिटल साथी

कार्यक्रम में बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री नंद किशोर ने कहा कि एआई पर्यटन की पूरी तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। पर्यटकों की पसंद, उनकी खोज और यात्रा संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर उन्हें उनकी जरूरत के अनुरूप पर्यटन स्थल, होटल, भोजन और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी जा सकती है। रोबोटिक्स और भाषा तकनीक के माध्यम से चीन, जापान, कोरिया जैसे देशों से आने वाले पर्यटकों को उनकी अपनी भाषा में सहायता उपलब्ध कराना भी संभव होगा। एयरपोर्ट और बोधगया जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल पर्यटकों के अनुभव को और सहज बना सकता है।

पर्यटन बनेगा संस्कृति, रोजगार और अर्थव्यवस्था का सेतु

बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक चंदन चौहान ने स्वागत संबोधन में कहा कि पर्यटन केवल एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा नहीं, बल्कि संस्कृतियों, परंपराओं और सभ्यताओं को जोड़ने वाला सेतु है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टू रीडिजाइन टूरिज्म’ विषय पर विशेषज्ञों ने पर्यटन में तकनीक की संभावनाओं पर विचार साझा किए। 

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम का समापन मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ। कलाकारों ने बिहार की समृद्ध लोक परंपरा, कला, संस्कृति और विरासत को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों का मन मोह लिया। प्रस्तुतियों के माध्यम से बिहार की विविध सांस्कृतिक विरासत और लोक कला की समृद्ध परंपरा को भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की। मौके पर बीआईए अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, योरहेरिटेज की निदेशक रचना प्रियदर्शी, एनआईटी पटना के प्रोफेसर डॉ. ज्योति प्रकाश सिंह, आईआईटी बिहटा के प्रोफेसर डॉ. सम्राट मंडल, बिहार चैप्टर के चेयरमैन प्रभात कुमार, पनास ग्रुप के महाप्रबंधक गिरीश सिन्हा समेत पर्यटन क्षेत्र से जुड़े अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।