Bihar News : बिहार के सरकारी भवनों पर लगेंगे सोलर प्लांट, अगले 5 वर्षों में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा का रखा गया लक्ष्य, रेस्को मॉडल को मिली मंजूरी

Bihar News : बिहार में वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक राज्य के सरकारी एवं सरकार के अधीन भवनों की छतों पर कुल 500 मेगावाट क्षमता के ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे.....पढ़िए आगे

Bihar News : बिहार के सरकारी भवनों पर लगेंगे सोलर प्लांट, अग
सरकारी भवनों पर सोलर प्लांट - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार सरकार ने 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 (आगामी पांच वर्षों) तक राज्य के सभी सरकारी एवं सरकार के अधीन आने वाले भवनों की छतों पर कुल 500 मेगावाट (MW) क्षमता के ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की योजना को मंजूरी दे दी गई है।

बिना पूंजी लगाए विभागों को मिलेगी बिजली (RESCO मॉडल):

इस महत्वाकांक्षी योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना 'रेस्को' (RESCO) मोड में की जाएगी। इस मॉडल के अंतर्गत सोलर प्लांट लगाने, उसके संचालन और दीर्घकालिक रखरखाव का पूरा दायित्व संबंधित डेवलपर (कंपनी) का होगा। इसके तहत सरकारी विभागों को शुरुआत में कोई पूंजीगत निवेश नहीं करना होगा, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

बिजली खरीद के लिए PPA को स्वीकृति:

योजना को धरातल पर उतारने और सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने संबंधित विभागों, स्वायत्त निकायों और सरकारी संस्थानों को RESCO डेवलपर के साथ उत्पादित बिजली की खरीद के लिए 'पावर परचेज एग्रीमेंट' (PPA) यानी बिजली खरीद समझौता करने की भी आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इससे डेवलपर्स को दीर्घकालिक सुरक्षा मिलेगी और राज्य को सस्ती व निर्बाध ग्रीन एनर्जी प्राप्त होगी।

बिजली बिल में आएगी भारी कमी

इस व्यापक पहल से बिहार के सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सरकारी भवनों में स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के उपयोग को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। छतों पर सोलर प्लांट चालू होने से ग्रिड से मिलने वाली पारंपरिक थर्मल बिजली पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। परिणामस्वरूप, सभी सरकारी विभागों के मासिक विद्युत व्यय (बिजली बिल) में भारी कटौती देखने को मिलेगी, जिससे राजस्व की बचत होगी।

'जल-जीवन-हरियाली' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

इस परियोजना का मूल उद्देश्य राज्य के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है। बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा के उत्पादन से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जो पर्यावरण संतुलन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से निपटने में मददगार साबित होगा। यह कदम पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के उद्देश्यों को तीव्र गति देने के साथ-साथ बिहार को एक 'हरित राज्य' बनाने की ओर अग्रसर करेगा।