बिहार की जेलों में अब कैदियों के लिए बदल जाएंगे नियम? पटना हाई कोर्ट ने नीतीश सरकार को दिया अल्टीमेटम, जानें क्या है '9 महीने' का राज
पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार को राज्य की जेलों में 'मॉडल प्रिजन मैन्युअल, 2016' लागू करने के लिए 9 महीने का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत तैयार इस मैन्युअल का उद्देश्य जेल कानूनों में एकरूपता लाना है।
Patna - पटना हाई कोर्ट ने बिहार की जेलों में सुधार और जेल नियमावली में एकरूपता लाने की दिशा में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 'मॉडल प्रिजन मैन्युअल, 2016' को लागू करने की प्रक्रिया को अगले 9 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार हुआ है मैन्युअल
एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने अभिनव शांडिल्य द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। गौरतलब है कि यह मैन्युअल भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देशभर की जेलों के संचालन, कैदियों के अधिकारों और नियमों में एकरूपता सुनिश्चित करना है।
राज्य सरकार ने दी अपनी दलील
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मॉडल प्रिजन मैन्युअल को अपनाने के लिए गठित कमेटी की कई बार बैठकें हो चुकी हैं। सरकार ने आश्वासन दिया कि वर्तमान में इस पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है और इसे लागू करने की तैयारी चल रही है। सरकार के इस पक्ष को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने समय-सीमा निर्धारित करते हुए याचिका को निष्पादित (Dispose) कर दिया।