ट्रेनों में प्लास्टिक प्लेट की जगह इस खास थाली में परोसा जाएगा यात्रियों को खाना, वंदे भारत और राजधानी एक्सप्रेस से होगी शुरूआत

भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला! मार्च से वंदे भारत और राजधानी जैसी ट्रेनों में प्लास्टिक प्लेट की जगह मिलेगी बायोडिग्रेडेबल थाली। पर्यावरण संरक्षण के लिए नई पहल।

ट्रेनों में प्लास्टिक प्लेट की जगह इस खास थाली में परोसा जाए

Patna - भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी (IRCTC) ने पर्यावरण को बचाने के लिए एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब देश की प्रीमियम ट्रेनों—वंदे भारत, बेंगलुरु राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस—में खाना परोसने के लिए प्लास्टिक की प्लेटों का इस्तेमाल बंद कर दिया जाएगा। इनके स्थान पर अब स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल 'बायोडिग्रेडेबल थाली' (Biodegradable Plates) का उपयोग किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य रेल परिसर को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाना है।

मार्च से शुरू होगी नई व्यवस्था

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था को मार्च 2026 से प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। शुरुआती चरण में इसे कुछ चुनिंदा प्रीमियम ट्रेनों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद, आने वाले समय में अन्य सभी लंबी दूरी की ट्रेनों और प्रीमियम श्रेणियों में भी प्लास्टिक प्लेटों को हटाकर बायोडिग्रेडेबल प्लेट्स का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

मात्र 6 महीने में मिट्टी में मिल जाएगी थाली


इन नई थालियों की सबसे बड़ी खूबी इनका प्राकृतिक रूप से नष्ट होना है। ये थालियां सब्जियों-फलों के छिलकों, रद्दी कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों के मिश्रण से बनाई जाती हैं। जहाँ साधारण प्लास्टिक प्लेट को पूरी तरह नष्ट होने में 400 से 500 साल का समय लगता है, वहीं ये बायोडिग्रेडेबल थालियां इस्तेमाल के बाद मात्र 3 से 6 महीने के भीतर गल-सड़कर मिट्टी में मिल जाती हैं और खाद बन जाती हैं।

हर महीने होगी 300 किलो प्लास्टिक की बचत

आंकड़ों के लिहाज से यह कदम पर्यावरण के लिए संजीवनी साबित होगा। रेलवे के अनुमान के मुताबिक, केवल इन तीन मुख्य ट्रेनों में बायोडिग्रेडेबल थाली शुरू करने से हर महीने 50,000 से अधिक प्लास्टिक प्लेटों की खपत कम होगी। इसका मतलब है कि प्रति माह 300 किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक कचरे को पैदा होने से रोका जा सकेगा, जिससे पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।