BPSC Result : कम उम्र में बड़ी उपलब्धि, दारोगा की बेटी निहारिका वत्स बनी एसडीएम, 70 वीं बीपीएससी में हासिल की 24वीं रैंक

BPSC Result : दारोगा संजय कुमार की बेटी निहारिका वत्स ने बिहार लोक सेवा आयोग की संयुक्त 70वीं प्रतियोगिता परीक्षा-2026 में 24वीं रैंक प्राप्त कर एक शानदार उपलब्धि अपने नाम की है.......पढ़िए आगे

BPSC Result : कम उम्र में बड़ी उपलब्धि, दारोगा की बेटी निहार
निहारिका वत्स बनी एसडीएम- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना के मीठापुर निवासी एवं बिहार पुलिस में कार्यरत सब इंस्पेक्टर संजय कुमार और गृहिणी नीतू कुमारी की पुत्री निहारिका वत्स ने बिहार लोक सेवा आयोग की संयुक्त 70वीं प्रतियोगिता परीक्षा-2026 में 24वीं रैंक प्राप्त कर एक शानदार उपलब्धि अपने नाम की है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ उनका चयन उप समाहर्ता (SDM) पद के लिए हुआ है। परिवार का स्थायी निवास पटना के बाढ़ में है। निहारिका की इस सफलता से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

विशेष बात यह है कि निहारिका ने मात्र 24 वर्ष की आयु में यह उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो कोई भी उपलब्धि असंभव नहीं होती। इतनी कम उम्र में एसडीएम जैसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक पद पर चयनित होना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है, जो हजारों युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

निहारिका वत्स प्रारंभ से ही मेधावी, अनुशासित और कुशाग्र बुद्धि की छात्रा रही हैं। उनकी उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिन्दू कॉलेज से संपन्न हुई है। उन्होंने मात्र 22 वर्ष की आयु में अपने प्रथम प्रयास में 69वीं बीपीएससी परीक्षा-2024 में 160वीं रैंक प्राप्त कर बिहार राजस्व सेवा में चयन हासिल किया था और वर्तमान में बक्सर के डुमरांव में राजस्व पदाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसके बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को और ऊंचा रखा तथा निरंतर अध्ययन, समर्पण और आत्मविश्वास के बल पर 70वीं बीपीएससी में 24वीं रैंक प्राप्त कर एसडीएम पद तक का गौरवपूर्ण सफर तय किया।

निहारिका की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। पिता संजय कुमार ने जहां अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का मार्ग दिखाया, वहीं उनकी माता नीतू कुमारी, जो एक गृहिणी हैं, ने अपने बच्चों के भीतर बड़े सपने देखने का साहस और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास जगाया। उन्होंने कभी अपने बच्चों को अपनी सीमाएं तय नहीं करने दीं, बल्कि हमेशा उन्हें अपनी क्षमता से आगे बढ़कर सोचने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। वे प्रतिदिन अपने बच्चों को यह विश्वास दिलाती रहीं कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। उनकी सकारात्मक सोच और अटूट विश्वास ही बच्चों की सफलता की सबसे मजबूत नींव बना।

निहारिका का परिवार शिक्षा और उपलब्धियों की दृष्टि से भी प्रेरणादायक है। उनकी बड़ी बहन डॉ. नैन्सी वत्स ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में स्नातकोत्तर चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (PG) की तैयारी कर रही हैं। वहीं उनके छोटे भाई आत्यम राज ने पटना स्थित ए.एन. कॉलेज से बीबीए (प्रतिष्ठा) की डिग्री प्राप्त की है। 24 वर्ष की आयु में एसडीएम और 22 वर्ष की आयु में प्रथम प्रयास में राजस्व पदाधिकारी बनने वाली निहारिका वत्स आज बिहार के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि जब सपने बड़े हों, मेहनत सच्ची हो और परिवार का विश्वास साथ हो, तब सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।