Bihar News : पटना के बांसघाट पर ईशा फाउंडेशन ने शुरू की आधुनिक सुविधाएं, अब निर्धारित शुल्क पर होगा अंतिम संस्कार

Bihar News : राजधानी पटना के प्रसिद्ध बांसघाट श्मशान घाट को 'ईशा फाउंडेशन' के सहयोग से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है........पढ़िए आगे

Bihar News : पटना के बांसघाट पर ईशा फाउंडेशन ने शुरू की आधुन
पार्थिव शरीर को सदगति - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : हर किसी की अंतिम यात्रा को सदगति प्रदान करने यानी मृत्यु के बाद मनुष्य के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सुविधापूर्ण और गरिमा के साथ करने को लेकर बिहार सरकार के स्तर से खास पहल शुरू की जा रही है। पटना में मौजूद बांसघाट स्थित शमशान घाट में कई तरह की आधुनिक सुविधाओं को ईशा फउंडेशन के स्तर से विकसित किया गया है। यहां आने वाले लोगों को अंतिम संस्कार करने से लेकर पंडितजी, नाई, डोम राजा समेत अन्य सभी तरह के विधि-विधानों में अब एक निर्धारित राशि ही खर्च करनी पड़ेगी। इसके लिए बांसघाट पर ईशा फाउंडेशन की तरफ से पूरी तरह से प्रशिक्षित स्वयं सेवकों की तैनाती भी की गई है, जो मृतकों के शोक-संतप्त परिजनों को सांत्वना देकर फिर से जीवन के प्रति आस पैदा कराने से लेकर अन्य सभी स्तर पर मदद प्रदान करेंगे। ये स्वयं सेवक मूल रूप तमिलनाडु के रहने वाले हैं। कई लोग तो इंजीनियर की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर ईशा फाउंडेशन से जुड़कर यहां लोगों की सेवा कर रहे हैं।

बांस घाट में बनेगा काल भैरव मंडपम

पटना का बांस घाट शमशान घाट 4.50 एकड़ में फैला हुआ एशिया का सबसे बड़ा शमशान घाट है। साथ ही यह पूर्वी भारत का आधुनिक सुविधाओं से लैस पहला शवदाह गृह भी है। यहां एक 8 फीट ऊंची काल भैरव की मूर्ति स्थापित होने वाली है और एक काल भैरव मंडपम बनेगा। इस स्थान का उपयोग पार्थिव शरीर को रखकर अंतिम संस्कार से पूर्व सभी क्रिया क्रमों को संपन्न किया जाएगा। यहां एक साथ 18 मृत शरीरों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। मृतक के परिजनों को बैठने के लिए दो एसी हॉल बनाए गए हैं। पीने का स्वच्छ पानी से लेकर शौचालय समेत अन्य सभी जरूरी सुविधाएं बहाल की गई हैं। गंगा जल से भरे हुए दो तालाब बनाए गए हैं, क्योंकि गंगाजी घाट से करीब 3 से 4 किमी दूर हो गई हैं। एक तालाब नहाने और दूसरा अस्थि विसर्जन के लिए उपयोग में आता है। 

15 दिनों में गैस से चलने वाले फर्नेंस होगा शुरू

बांस घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए लकड़ी आधारित 6, बिजली से चलने वाले 4 फर्नेंस और 8 खुले स्थल मौजूद हैं। आगामी 15 दिनों में अंतिम संस्कार के लिए गैस से चलने वाले खास तरह के फर्नेंस तैयार हो जाएंगे, जहां आसानी से शवदाह किया जा सकता है। यह दूसरे अन्य सभी माध्यमों से कम लागत वाला है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। वर्तमान में यहां शवदाह में आने वाला खर्च 3500 रुपये के अलावा 500 रुपये डोम राजा का, 250 रुपये पंडितजी और 150 रुपये नाई का शुल्क लगता है। वहीं, लकड़ी से अंतिम संस्कार कराने की स्थिति में लकड़ी की कीमत अलग से शामिल होती है।  

दीघा घाट में भी बनेगा आधुनिक शवदाह गृह

राजधानी में एक अन्य स्थान दीघा घाट पर मौजूद शमशान घाट को नए तरीके से आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। यह शवदाह गृह एलपीजी गैस आधारित होगा। इसे भी ईशा फाउंडेशन ही विकसित करने जा रहा है। पटना में दो स्थानों के अलावा बेगूसराय के सिमरिया घाट, भागलपुर, गया, सहरसा और छपरा में मौजूद शवदाह गृहों को आधुनिक तरीके से विकसित करने की योजना है। 2025 में राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में ईशा फाउंडेशन को छह शहरों के शमशान घाटों को ईशा फाउंडेशन से विकसित कराने का निर्णय लिया था। इसे लेकर जून 2025 में सरकार के साथ ईशा फाउंडेशन की सामाजिक एवं पर्यावरण कल्याण के लिए काम करने वाली इकाई ईशा ऑउटरिच का एक समझौता भी हुआ। इस समझौते के बाद शमशान घाटों की तस्वीर बदलकर सुविधायुक्त बनाने की कवायद शुरू की गई।

ईशा फाउंडेशन की सेवा एक नजर में

ईशा फाउंडेशन की शमशानघाट सेवा का कार्यक्रम पिछले 15 वर्षों से चल रहा है। अकेले तमिलनाडु में 33 से अधिक शवदाह गृहों का संचालन संस्थान कर रही है। इस समयावधि में सवा लाख से अधिक मृत शरीर का अंतिम संस्कार इन आधुनिक तरीके से संचालित शवदाह गृहों में किया जा चुका है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों के लिए अंतिम संस्कार की सेवा पूरी तरह से मुफ्त रखी गई है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में बिहार में भी यह सुविधा गरीबों को मुफ्त मिलेगी।