जदयू की समीक्षा बैठक में फिर गायब रहेंगे ललन सिंह, पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी के संकेत? भाजपा संग रिश्तों पर होगा बड़ा फैसला
ललन सिंह को कभी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम रही है कि नीतीश कुमार अपने कई महत्वपूर्ण फैसलों पर ललन सिंह से विचार-विमर्श करते रहे हैं।
JDU : सारण और तिरहुत की दो विधान परिषद सीटों पर जदयू उम्मीदवारों की हार के बाद 5 नवंबर को पार्टी की समीक्षा बैठक होने जा रही है। इस बैठक में हार के कारणों की पड़ताल होगी। पराजित उम्मीदवारों के साथ संबंधित क्षेत्रों के नेताओं से भी जवाब-तलब किया जाएगा। बैठक में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा मौजूद रहेंगे, लेकिन केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह इसमें शामिल नहीं होंगे।
ललन सिंह की गैरमौजूदगी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि पिछले कुछ समय से पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और बैठकों में उनकी अनुपस्थिति लगातार सवाल खड़े कर रही है। कुछ सप्ताह पहले जदयू विधायकों और विधान पार्षदों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था।
नीरज को नहीं मिला ललन का समर्थन!
पटना स्नातक सीट से जीतने वाले नीरज कुमार ने भी ललन सिंह से बधाई नहीं मिलने पर तंज कसा था। फरक्का जलसंधि को लेकर जदयू के कार्यक्रम में भी ललन सिंह की मौजूदगी नहीं दिखी। वहीं, नीरज कुमार का विरोध करने वाले मोकामा विधायक अनंत सिंह के प्रति उन्होंने सहानुभूति जताई थी। खास बात यह रही कि नीरज कुमार के चुनाव प्रचार में भी ललन सिंह शामिल नहीं हुए, जबकि उनके संसदीय क्षेत्र के मोकामा और बाढ़ विधानसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ था। अब एमएलसी चुनाव की हार पर होने वाली समीक्षा बैठक से भी उनकी दूरी कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रही है।
नीतीश के भरोसेमंद
ललन सिंह को कभी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम रही है कि नीतीश कुमार अपने कई महत्वपूर्ण फैसलों पर ललन सिंह से विचार-विमर्श करते रहे हैं। ऐसे में पार्टी की अहम बैठकों से उनकी लगातार गैरमौजूदगी को महज संयोग मानना आसान नहीं है। ललन सिंह केंद्र सरकार में मंत्री हैं, लेकिन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा जैसी महत्वपूर्ण बैठक में उनकी अनुपस्थिति जदयू के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों और नेतृत्व के साथ उनके मौजूदा संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रही है।
भाजपा से भी तकरार
एमएलसी चुनाव में जदयू उम्मीदवारों को हराने वाले निर्दलीय विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज को भाजपा ने पार्टी में शामिल कराने की पहल की थी। दोनों नेताओं की भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें और सदस्यता ग्रहण करने की खबर सामने आने के बाद जदयू के कई नेताओं ने इस फैसले पर खुलकर नाराजगी जताई थी। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा समेत पार्टी नेताओं ने इस कदम पर सवाल उठाए थे। बाद में भाजपा ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं ने पार्टी की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि उसे समर्थन देने का फैसला किया है।
चुनाव में जदयू उम्मीदवारों को हराने वाले नेताओं को भाजपा की ओर से मिले इस राजनीतिक महत्व और जदयू की नाराजगी ने एनडीए के भीतर सहयोगी दलों के रिश्तों को लेकर भी चर्चा तेज कर दी थी। जदयू की आज की बैठक में इस महत्वपूर्ण मामले पर भी पार्टी नेताओं में विमर्श हो सकता है।