Bihar liquor news: साल 2016 से बिहार में जारी है शराब बंदी! जानें इन 9 सालों में कितनी लोगों की हुई मौत, आंकड़ा जान चौंक जाएंगे आप

बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी के बावजूद ज़हरीली शराब से 190 से अधिक मौतें हुई हैं। जानिए इस नीति की चुनौतियाँ और वास्तविक प्रभाव।

Bihar liquor news: साल 2016 से बिहार में जारी है शराब बंदी!
Bihar liquor ban- फोटो : freepik

Bihar liquor news: बिहार सरकार ने अप्रैल 2016 में शराब की बिक्री, निर्माण और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया था। इस नीति का उद्देश्य घरेलू हिंसा, गरीबी और नशाखोरी जैसे मुद्दों से निपटना था।हालांकि, इस सख्त फैसले के कई अवांछित दुष्परिणाम सामने आए हैं, जिसमें सबसे गंभीर है ज़हरीली शराब पीने से लोगों की मौत। इसके अलावा, तस्करी, भ्रष्टाचार, और कानून के दुरुपयोग जैसे मुद्दे भी गहराते जा रहे हैं।

2016 के बाद ज़हरीली शराब से 190 से अधिक मौतें

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अनुसार, बिहार में 2016 से अब तक 190 से अधिक लोगों की मौत ज़हरीली शराब पीने से हुई है।

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सबसे प्रभावित जिले:

सारण

सीवान

गया

भोजपुर

बक्सर

गोपालगंज

इन ज़िलों में मौतें उस अवैध शराब से हुई हैं, जिसे घरों में या जंगलों में गुप्त रूप से तैयार किया जाता है। इनमें अक्सर मिथाइल अल्कोहल जैसी खतरनाक रसायन होते हैं, जो सीधे तौर पर जानलेवा हैं।

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शराब तस्करी और सरकार की कार्रवाई

बिहार सरकार ने शराबबंदी को लागू करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। इसके बावजूद, शराब तस्करी का कारोबार तेज़ी से फल-फूल रहा है, खासकर उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमाओं से।

अब तक की कार्रवाई (मार्च 2025 तक):

कुल दर्ज मामले: 9.36 लाख

गिरफ्तारियां: 14.32 लाख

ज़ब्त शराब: 3.86 करोड़ बल्क लीटर

जब्त वाहन: 1.40 लाख

छापेमारी के लिए 33 खोजी कुत्तों का इस्तेमाल

97% ज़ब्त शराब नष्ट कर दी गई है, लेकिन इसकी मात्रा यह दर्शाती है कि शराब का काला बाज़ार कितना सक्रिय है।

सख्ती के बावजूद नतीजे नदारद

शराबबंदी का उद्देश्य था समाज को नशे से मुक्त करना, परंतु इसके नकारात्मक परिणाम अधिक देखने को मिले हैं। उदाहरण के तौर पर ज़हरीली शराब से मौतें हो रही हैं। पुलिस और अदालतों पर वर्कलोड बढ़ रहा है। इसकी वजह से गरीबों का अधिक उत्पीड़न हो रहा है। इसकी मदद से शराब तस्करों का दबदबा बढ़ता जा रहा है।इनमें सबसे चिंताजनक बात है कि इस कानून के तहत अक्सर गरीब और दलित वर्ग के लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जबकि असली तस्कर आसानी से बच निकलते हैं।

आर्थिक प्रभाव और राजस्व की भरपाई

शराबबंदी से पहले बिहार सरकार को सालाना लगभग ₹5,000 करोड़ का शराब कर राजस्व मिलता था। इसके बाद राजस्व की भरपाई के लिए सरकार ने भूमि व संपत्ति पंजीकरण पर ध्यान केंद्रित किया।

वित्त वर्ष 2024-25:

लक्ष्य: ₹7,500 करोड़

प्राप्ति: ₹7,648.88 करोड़ (अब तक की सबसे अधिक राशि)

हालांकि यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, परंतु इस नीति से जुड़ी मानव जीवन की क्षति और सामाजिक असंतुलन को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।