Bihar News : नीट छात्रा मामले में CBI जांच पर सांसद अरुण भारती का बड़ा बयान, कहा- सरकार ने सुनी पीड़ित परिवार की पुकार

Bihar News : नीट छात्रा मामले में CBI जांच पर सांसद अरुण भार

PATNA : लोजपा (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने पटना के चर्चित नीट छात्रा मामले में सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की न्याय की मांग को बिहार सरकार ने बेहद गंभीरता से सुना है। भारती के अनुसार, इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच जरूरी थी और देश में सीबीआई से बेहतर और विश्वसनीय कोई दूसरी जांच एजेंसी नहीं है, जो निष्पक्षता से सच्चाई सामने ला सके।

सांसद अरुण भारती ने पार्टी की सक्रियता का जिक्र करते हुए बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के निर्देश पर एक विशेष कमेटी पीड़ित परिवार से मिलने गई थी। कमेटी के सदस्य संजय पासवान ने परिजनों से मुलाकात कर उनकी मांगों और चिंताओं को करीब से सुना। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद चिराग पासवान ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की वकालत की थी। भारती ने कहा कि सरकार का उद्देश्य 'दूध का दूध और पानी का पानी' करना है ताकि अपराधी बच न सकें।

विपक्ष पर हमला बोलते हुए अरुण भारती ने तेजस्वी यादव की नैतिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि वे अब तक पीड़ित परिवार से मिलने तक नहीं गए। भारती ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "तेजस्वी यादव केवल बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कभी परिवार का दुख जानने की कोशिश नहीं की। हमारे लिए यह ज्यादा अहम है कि पीड़ित परिवार क्या चाहता है।"

सीबीआई जांच को बिहार पुलिस की विफलता बताने वाली खबरों को अरुण भारती ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच का मतलब यह कतई नहीं है कि स्थानीय पुलिस अक्षम है। उन्होंने कहा, "यह धारणा गलत है कि जहां पुलिस नाकाम होती है, वहीं सीबीआई जाती है। वास्तव में, बिहार पुलिस और सीबीआई इस मामले में समन्वय के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर केस को मजबूत बनाया जा सके।"

इसके अलावा, सांसद ने बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादले पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने चुनाव आयोग को एक पूर्णतः स्वायत्त संस्था बताया और कहा कि चुनाव के दौरान अधिकारियों की तैनाती या फेरबदल करना आयोग का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग की कार्यप्रणाली में सरकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है और सभी को इसकी निष्पक्षता का सम्मान करना चाहिए।