Patna High Court News : निजी छात्रावासों की सुरक्षा पर पटना हाईकोर्ट सख्त: राज्य सरकार से मांगा जवाब, पूछा- मॉनिटरिंग के लिए क्या है कानूनी व्यवस्था?

Patna High Court News : निजी छात्रावासों की सुरक्षा पर पटना

PATNA : पटना हाईकोर्ट  ने बिहार में निजी छात्रावासों के संचालन और निगरानी को लेकर दायर एक लोकहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से ज़वाब मांगा है। अधिवक्ता माधव राज की ओर से दायर इस जनहित याचिका पर आज सुनवाई की गयी। सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस  संगम कुमार साहू और जस्टिस विवेक चौधरी की खंडपीठ ने सरकार को इस सम्बन्ध में विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट  ने पूछा है कि क्या बिहार में निजी छात्रावासों—विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए संचालित छात्रावासों—की सुरक्षा, संरक्षा, भोजन और स्वच्छता से जुड़े पहलुओं की निगरानी के लिए कोई वैधानिक या नियामक निकाय मौजूद है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में निजी छात्रावासों के लिए कोई प्रभावी नियंत्रण तंत्र नहीं है। इसके चलते वहां रहने वालों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं असुरक्षित बनी रहती हैं।

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि अन्य राज्यों, जैसे तमिलनाडु, में निजी छात्रावासों के संचालन के लिए स्पष्ट नियम-कायदे और निगरानी व्यवस्था लागू है। जबकि बिहार में ऐसी व्यवस्था का अभाव है। हाल में छात्रावासों के भीतर हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ता ने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की। शम्भू हॉस्टल में एक छात्रा की संदेहास्पद मौत और जाँच की सही दिशा नहीं  होने के कारण बहुत भ्रम की स्थिति है। ये भी पाया गया कि हॉस्टल प्रबंधकों ने विरोधाभासी बयान दिये,इससे मामला और भी पेचीदा होता जा रहा है।

इसी सन्दर्भ में  बिहार के निजी हॉस्टालो की जाँच और उनकी व्यवस्था सही हो,  इसके लिए एक जनहित याचिका सुषमा कुमारी की अधिवक्ता अलका वर्मा ने दायर की है। इसमें कोर्ट से ये मांग की गयी है कि नीट छात्रा की हॉस्टल में  हुई घटना में पटना हाईकोर्ट हस्तक्षेप करें और हो रही जांच की निगरानी करे।मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी,2026 को तय की गई है।