Patna SHO Suspended: पटना एसएसपी ने नौबतपुर थानेदार को किया सस्पेंड, इस आरोप में नपा गए एसएचओ, पुलिस महकमे में हड़कंप

Patna SHO Suspended: पटना के नौबतपुर से पुलिस महकमे को हिला देने वाली कार्रवाई सामने आई है।

Naubatpur SHO Suspended
नौबतपुर थानेदार सस्पेंड- फोटो : reporter

Patna SHO Suspended: पटना के नौबतपुर से पुलिस महकमे को हिला देने वाली कार्रवाई सामने आई है। मठ की जमीन से जुड़े विवाद में एक पक्ष का  साथ देने के आरोप में नौबतपुर थानाध्यक्ष मंजित ठाकुर को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद पटना एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया।

मामला नौबतपुर थाना क्षेत्र के पेनापुर स्थित मठ की जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि जमीन विवाद में थानेदार की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही और वह कथित तौर पर एक पक्ष के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। दूसरे पक्ष की ओर से इसको लेकर पुलिस मुख्यालय में शिकायत पहुंचाई गई, जिसके बाद मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान थानेदार की भूमिका और उन पर लगाए गए पक्षपात के आरोपों की पड़ताल की गई। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने कार्रवाई का आदेश जारी किया। इसके बाद पटना एसएसपी ने मंजित ठाकुर को निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया।

मंजित ठाकुर का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है। एक विदेशी महिला से जुड़े कथित चाकूबाजी प्रकरण में लापरवाही के आरोप के बाद भी उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई होने की बात सामने आई थी। बाद में उन्हें नौबतपुर थाने की कमान सौंपे जाने को लेकर भी सवाल उठे थे।

इसके अतिरिक्त पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी उनके विरुद्ध शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई थी। स्थानीय स्तर से उठी शिकायत पुलिस मुख्यालय तक पहुंची थी, जिसके बाद तत्कालीन सिटी एसपी स्तर से मामले की जांच कराई गई थी।

अब मठ की जमीन के विवाद में निलंबन के बाद पुलिस महकमे में एक बार फिर थानेदार की पूर्व शिकायतों और पूर्व कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि पहले से विवादों में रहे अधिकारी को महत्वपूर्ण थाने की कमान सौंपने से पहले विभागीय स्तर पर क्या समीक्षा की गई थी। फिलहाल निलंबन के बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

मठ की जमीन विवाद में हुई ताजा कार्रवाई ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। खासकर यह सवाल चर्चा में है कि यदि पूर्व में भी थानेदार की भूमिका को लेकर शिकायतें और कार्रवाई सामने आ चुकी थीं, तो इसके बावजूद उन्हें नौबतपुर जैसे महत्वपूर्ण थाने की कमान कैसे सौंपी गई।फिलहाल निलंबन के बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। इस पूरे प्रकरण में आगे की जांच और विभागीय रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि थानेदार की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों पर क्या अंतिम कार्रवाई होती है। मामले ने एक बार फिर पुलिस की निष्पक्षता, जवाबदेही और जमीन विवादों में कानून के समान इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी है।

अनिल की रिपोर्ट