Bihar News : 21 साल बाद मिली बेगुनाही ! हत्या के केस में रंजीत झा बाइज्जत बरी, पटना हाईकोर्ट ने पुलिस और सिस्टम को जमकर लताड़ा

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने न्याय की एक ऐतिहासिक मिसाल पेश करते हुए हत्या के मामले में 21 वर्षों से जेल में बंद रंजीत कुमार झा को बाइज्जत बरी कर दिया है.....पढ़िए आगे

Bihar News : 21 साल बाद मिली बेगुनाही ! हत्या के केस में रंज
हत्यारोपी को राहत - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में ऐतिहासिक और बड़ा निर्णय देते हुए 21 वर्षों से जेल में बंद रंजीत कुमार झा को बाइज्जत बरी कर दिया है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द करते हुए इस मामले को पूरी तरह से झूठा और पुलिस की गंभीर लापरवाही का नतीजा करार दिया।

यह मामला समस्तीपुर जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र का है, जहां 5 अक्टूबर ,2000 को पवन कुमार झा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रंजीत झा पर आरोप लगाया गया था कि उसने 3,300 रुपये की चोरी के विवाद को लेकर अपने साथियों के साथ मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया। साल 2009 में समस्तीपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने रंजीत को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने  तल्ख टिप्पणियां करते हुए इसे व्यवस्था की नाकामी बतायी। इस मामलें की सुनवाई के दौरान जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने पुलिस, कानूनी सहायता प्रणाली (लीगल एड) और जेल प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर की। इसे झूठा केस और आपसी रंजिश का मामला कहा। कोर्ट ने माना कि मुख्य गवाहों और आरोपी के बीच पुरानी दुश्मनी थी। चश्मदीदों के बयानों में भारी विरोधाभास पाया गया। इस मामलें में पुलिस की घोर लापरवाही बरती गई। टॉर्च की रोशनी में आरोपी को पहचानने का दावा किया गया था, लेकिन पुलिस ने उस टॉर्च को जब्त तक नहीं किया। इसके अलावा, प्रथम सूचना रिपोर्ट  की प्रति को कोर्ट में भेजने में 4 दिनों की अनुचित देरी की गई। मानसिक बीमारी और विधिक सहायता में नाकामी भी शामिल रही। लंबे कारावास के कारण रंजीत झा डिप्रेशन और मानसिक बीमारी से पीड़ित हो गए। गरीबी के कारण वे 16.5 साल तक हाईकोर्ट में अपील भी दाखिल नहीं कर सके। 

हाईकोर्ट ने इस पर बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जेल प्रशासन की विफलता पर कड़ा ऐतराज जताया।14 साल की वास्तविक सजा और छूट मिलाकर 20 साल की अवधि पूरी होने के बावजूद, रिमिशन बोर्ड ने उनकी समय-पूर्व रिहाई के प्रस्ताव को 11 महीने तक बिना वजह लटकाए रखा। सरकार और पुलिस विभाग को कड़े निर्देश देते हुए कोर्ट ने दोषी अधिकारियों पर जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) को दिया।

इस मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने और 2 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है । साथ ही कोर्ट ने रंजीत झा के मुफ्त इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था करने का निर्देश बिहार सरकार को आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि वह रंजीत झा के मानसिक स्वास्थ्य का पूरा इलाज सरकारी खर्च पर कराए और एक महीने के भीतर उनके पुनर्वास की उचित योजना बनाए। हाईकोर्ट ने वकील को मानदेय देने का निर्देश  दिया। पटना हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी को याचिकाकर्ता के वकील अनिल सिंह को पच्चीस हज़ार रुपये की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।