परिसर से शराब मिलने मात्र से संपत्ति नहीं होगी जब्त, 'स्वामी की मिलीभगत' साबित करना अनिवार्य, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

पटना हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आपके परिसर से शराब मिलने मात्र से प्रशासन आपकी जमीन या मकान जब्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा- जब तक मालिक की संलिप्तता साबित न हो, जब्ती की कार्रवाई गैर-संवैधानिक है।

परिसर से शराब मिलने मात्र से संपत्ति नहीं होगी जब्त, 'स्वामी

Patna - : पटना हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल किसी परिसर से शराब बरामद होने के आधार पर उस संपत्ति को सील या जब्त नहीं किया जा सकता। जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने अपने निर्णय में जोर देकर कहा कि जब्ती की कार्रवाई तभी वैध मानी जाएगी, जब अवैध शराब के भंडारण में परिसर स्वामी की प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत ठोस सबूतों के साथ सिद्ध हो। 

क्या था पूरा मामला?

यह मामला नवादा जिले के उत्पाद थाना कांड संख्या 873/2024 से जुड़ा है। 13 दिसंबर, 2024 को पुलिस ने दो आरोपितों को 1.500 लीटर अवैध विदेशी शराब के साथ पकड़ा था। साथ ही, याचिकाकर्ता दयामंती देवी की घेराबंदी वाली खाली जमीन पर कचरे के ढेर में छिपी एक बोरी से 2.625 लीटर शराब मिली थी। इसी बरामदगी को आधार बनाकर प्रशासन ने जमीन को सील कर जब्ती की कार्यवाही शुरू कर दी थी। 

संविधान के अनुच्छेद 300A का हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल न तो मामले में अभियुक्त हैं और न ही पकड़े गए आरोपितों से उनका कोई संबंध है। कोर्ट ने पाया कि राज्य पक्ष स्वामी की संलिप्तता का कोई भी प्रमाण पेश करने में विफल रहा। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के किसी की संपत्ति को सील करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 300A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन है। 

दो सप्ताह में जमीन 'डी-सील' करने का आदेश

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की जमीन पर चल रही जब्ती कार्यवाही को तुरंत रद्द कर दिया है। अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर संबंधित जमीन को डी-सील (De-seal) कर स्वामी को सौंप दिया जाए। इस फैसले से उन मकान और जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिली है, जिनके खाली परिसर का दुरुपयोग बाहरी तत्वों द्वारा शराब छिपाने के लिए किया जाता है।