पटना हाईकोर्ट ने सासाराम की निचली अदालत के आदेश पर अपनाया सख्त रुख, कार्रवाई को बताया न्यायिक अनुशासनहीनता

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि जब मुख्य मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है, तब ट्रायल कोर्ट का इस तरह की कार्रवाई करना न्यायिक अनुशासनहीनता को दर्शाता है।

Patna High Court
Patna High Court - फोटो : news4nation

Patna High Court :  पटना हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा अवमानना कार्रवाई और आदेश पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि न्यायिक अनुशासन का पालन आवश्यक हैं। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद एवं जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने रोहतास (सासाराम) के एक आपराधिक मामले में निचली अदालत द्वारा की गई कार्रवाई और आदेशों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। 


हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन हो, तो निचली अदालत को प्रक्रियात्मक मर्यादा और न्यायिक अनुशासन का पालन करना चाहिए था। रोहतास जिले के सासाराम नगर थाना कांड संख्या 183/2022 से जुड़े एक आपराधिक मामले में निचली अदालत ने निर्णय सुनाते हुए पीड़िता के खिलाफ धारा 193 आईपीसी (झूठी गवाही देना) के तहत प्राथमिकी एफआईआर दर्ज करने का आदेश एसपी को दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी), रोहतास के खिलाफ टिप्पणी की गई थी।


सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया गया कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता  की धारा 195 (अब BNSS की धारा 215) के तहत धारा 193 आईपीसी के तहत मामला केवल संबंधित अदालत द्वारा लिखित शिकायत के माध्यम से दर्ज किया जा सकता है, न कि सीधे एफआईआर का निर्देश देकर।  


राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि अपील हाईकोर्ट में लंबित होने और रिकॉर्ड मंगाए जाने के बावजूद निचली अदालत ने आदेश के पालन में देरी का हवाला देते हुए समानांतर सुनवाई शुरू कर दी। इस दौरान रोहतास के तत्कालीन एसपी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई करते हुए उन्हें दोषी करार दिया गया और जुर्माना भी लगा दिया गया।  


हाईकोर्ट ने इस स्थिति को अभूतपूर्व और असाधारण बताते हुए कहा कि जब मुख्य मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है, तब ट्रायल कोर्ट का इस तरह की कार्रवाई करना न्यायिक अनुशासनहीनता को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश निचली अदालत द्वारा की जा रही आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा गया कि मामले को अभी और आगे न बढ़ाया जाए।  


हाईकोर्ट ने सासाराम (रोहतास) के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तथा ट्रायल कोर्ट द्वारा शुरू की गई क्रिमिनल मिस. केस की पूरी फाइल व आदेश की कॉपियां मांगी गई हैं। मामलें की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस अपील (क्रिमिनल अपील संख्या 1385/2025) और इससे जुड़ी अन्य अपीलों को 25 नवंबर, 2026 को शीर्ष 5 मामलों में रखकर अंतिम सुनवाई करने का आदेश दिया है।