पटना की सड़कों पर नया बदलाव, महिलाओं के हाथों में होगी पिंक बस की स्टीयरिंग, जानिए कैसे हो रही तैयारी

Patna Pink bus service: महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्टीयरिंग थामकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं। पिंक बस योजना के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने की यह कोशिश अब ज़मीनी शक्ल लेती नजर आ रही है।...

Patna Pink bus service
इतिहास रचने को तैयार महिलाएं- फोटो : social Media

Patna Pink bus service:बिहार की समाजिक कल्पना में एक नई इबारत लिखी जा रही है। अब यह महज़ कोई ख्वाब या नारा नहीं, बल्कि हकीकत का वो मंजर है जहां महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्टीयरिंग थामकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं। पिंक बस योजना के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने की यह कोशिश अब ज़मीनी शक्ल लेती नजर आ रही है।

राजधानी पटना की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही नज़ारा देखने को मिल रहा है। महिला चालक न सिर्फ बस चला रही हैं, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ भारी वाहनों को नियंत्रित करने की कला भी सीख रही हैं। पहले चरण की ट्रेनिंग मुकम्मल कर चुकी पांच महिला चालक आरती कुमारी, रागिनी कुमारी, सरस्वती कुमारी, गायत्री कुमारी और बेबी कुमारी अब दूसरे चरण में असल सड़कों पर अपनी महारत को निखार रही हैं।पिछले तीन दिनों से बेली रोड रूट पर ये महिलाएं हेवी मोटर व्हीकल (एचएमवी) लाइसेंस के साथ अनुभवी प्रशिक्षकों की निगरानी में बस की स्टीयरिंग संभाल रही हैं। यह सिर्फ ड्राइविंग नहीं, बल्कि एक नई सोच और बदलाव की दस्तक है। अगले 15 दिनों तक इनका व्यावहारिक प्रशिक्षण जारी रहेगा, जिसके बाद इनके हुनर की जांच होगी। कामयाब होने पर इन्हें पिंक बस की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।

बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। निगम की योजना है कि राज्य में चलाई जाने वाली 100 पिंक बसों में महिला चालकों की तैनाती की जाए। यह न सिर्फ रोजगार के नए अवसर खोलेगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाएगा। इस सिलसिले में 21 अन्य महिला चालक भी तैयार की जा रही हैं, जिन्हें इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च में ट्रेनिंग दी जा रही है। यहां उन्हें सिर्फ गाड़ी चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियम, इंजन की बारीकियां और आपातकालीन हालात से निपटने का हुनर भी सिखाया जा रहा है।

ट्रेनिंग का तरीका भी बेहद आधुनिक और मुकम्मल रखा गया है। सिमुलेटर पर अभ्यास के जरिए उन्हें पहले वर्चुअल माहौल में तैयार किया जाता है, फिर असल सड़कों पर उतरकर रियल-टाइम ड्राइविंग का अनुभव दिया जाता है। यह पूरा प्रोसेस उन्हें एक प्रोफेशनल और आत्मनिर्भर चालक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

सियासी नजरिए से देखें तो यह पहल सरकार के महिला सशक्तिकरण एजेंडे को मजबूती देती है। वहीं, समाजी सतह पर यह कदम उन तमाम धारणाओं को चुनौती देता है, जो अब तक भारी वाहनों की ड्राइविंग को सिर्फ पुरुषों का क्षेत्र मानती रही हैं।

अब सवाल यह नहीं कि महिलाएं बस चला सकती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि वे इस जिम्मेदारी को कितनी बेहतरीन तरीके से निभा रही हैं और शुरुआती तस्वीर यही बताती है कि वे इस इम्तिहान में पूरी तरह कामयाब होने की राह पर हैं।बिहार की सड़कों पर यह बदलाव सिर्फ ट्रैफिक का नहीं, बल्कि सोच का भी है जहां अब स्टीयरिंग पर महिलाओं की मजबूत पकड़ एक नए दौर की शुरुआत का ऐलान कर रही है।